दुनिया के सबसे खूंखार नेपाली गोरखा लड़ाके भारतीय सेना में शामिल होने को बेताब

The world's most dreaded Nepali Gurkha fighters are desperate to join the Indian Army

  • नेपाल के युवा भारतीय सेना का हिस्सा बनने के लिए बेताब हैं
  • भर्ती का इंतजार करते-करते नेपाली गोरखाओं की निकल रही उम्र
  • अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से रुकी है भारतीय सेना में भर्ती

काठमांडू/एजेंसी। नेपाल के युवाओं का भारतीय सेना का हिस्सा बनने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। नेपाल में हर साल बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए प्रशिक्षण लेते हैं, लेकिन अब इन युवाओं की उम्र बीत रही है और अभी तक ये साफ नहीं है कि उन्हें मौका मिलेगा या नहीं। 19 साल के शिशिर भट्टरई ऐसे ही युवाओं में हैं। मध्य नेपाल के रहने वाले शिशिर इस समय पश्चिमी नेपाल के पोखरा में इस समय ब्रिटिश सेना में भर्ती होने के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं। हालांकि, उनका पहला सपना भारतीय सेना में शामिल होना रहा है।
अल जजीरा से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘ब्रिटिश सेना से पहले मेरा सपना भारतीय सेना में शामिल होने का था। बहुत से गोरखा भारत में सेवा कर चुके हैं और मैं अपने पूर्वजों की विरासत को बनाए रखना चाहता हूं।’ लेकिन उनके जैसे दूसरे नेपाली युवाओं के पास भारतीय सेना में भर्ती होने का विकल्प नहीं है। साल 2022 में भारतीय सेना में अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाल सरकार ने नेपाली नागरिकों के इसमें हिस्सा लेने पर रोक लगा दी है।
शिशिर इस रोक को काफी दुखद बताते हैं। वे कहते हैं अतीत में हमारे पास कम से कम भारतीय सेना में शामिल होने का विकल्प होता था। वो भारत से नियमों में बदलाव की उम्मीद जताते हैं, जिससे नेपाली युवाओं को मदद मिलेगी और काम के ज्यादा विकल्प होंगे। दरअसल, नेपाल के गोरखा ब्रिटिश काल से ही भारतीय सेना का हिस्सा रहे हैं और आजादी के बाद भी इस परंपरा जारी रही, लेकिन अब यह रुक गया है।
गोरखाओं को दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकों में से एक माना जाता है। भारतीय सेना के हिस्से के रूप में उन्होंने भारत के लिए कई अहम लड़ाइयां लड़ी हैं, जिसमें 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध भी शामिल है। भारत में गोरखा सैनिकों की मौजूदगी 1800 के दशक की शुरुआत से है, जह यह उपमहाद्वीप ब्रिटिश शासन के अधीन था।
आजादी के बाद भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किया, जिससे नई दिल्ली ने भारतीय सेना में गोरखाओं की भर्ती रखने की अनुमति दी। लेकिन यह 2022 में भारत के सेना की भर्ती योजना में बदलाव के बाद यह समझौता रुक गया है। भारत ने अग्निपथ नाम से भर्ती योजना शुरू की है। इसमें साढ़ 17 से 21 की उम्र के पुरुषों और महिलाओं को सिर्फ चार साल के लिए भर्ती किया जाता है। भर्ती किए युवाओं में केवल एक चौथाई को ही नियमित सेवा में रखा जाएगा। बाकी को नौकरी छोड़नी होगी और उन्हें कोई पेंशन नहीं मिलेगा। नेपाल सरकार ने इस पर आपत्ति जताते हुए युवाओं की भर्ती रोक दी है।

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