पटवारियों के दफ्तर में ‘निजी ऑपरेटर’ का खेल? किसानों से अवैध वसूली के आरोप
शुल्क नहीं देने पर महीनों चक्कर लगाने को मजबूर किसान, खड़गवां तहसील में उठे सवाल

शोभित शर्मा,एमसीबी/छत्तीसगढ़। खड़गवां तहसील में हल्का पटवारियों की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि कई पटवारियों ने अपने कार्यालय में निजी कंप्यूटर ऑपरेटर रखे हुए हैं, जो किसानों से काम कराने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जमीन से जुड़े कार्य जैसे नक्शा, खसरा, नामांतरण, सीमांकन या अन्य दस्तावेज़ निकलवाने के लिए जब वे पटवारी कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें सीधे कंप्यूटर ऑपरेटर के पास भेज दिया जाता है। वहीं उनसे निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
शुल्क नहीं दिया तो महीनों चक्कर
किसानों का आरोप है कि यदि कोई किसान ऑपरेटर द्वारा मांगी गई राशि नहीं देता, तो उसका काम लंबे समय तक लंबित रखा जाता है और उसे बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे किसानों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वसूली का माध्यम बने ऑपरेटर?
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर इन कंप्यूटर ऑपरेटरों को वसूली का माध्यम बना दिया गया है। किसानों का आरोप है कि बिना पैसे दिए उनके काम आगे नहीं बढ़ते।
जांच की उठी मांग
मामले को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पटवारी कार्यालयों में निजी कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि अवैध वसूली की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। अब देखना होगा कि मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों की शिकायतों पर क्या कदम उठाता है।




