दून एक्सप्रेस के जनरल कोच में 66 दिन बाद फिर मिले 16 जीवित कछुए
धनबाद में आरपीएफ ने वन विभाग को सौंपा

धनबाद/झारखंड। 66 दिनों बाद योग नगरी ऋषिकेश से हावड़ा जा रही दून एक्सप्रेस में फिर जीवित कछुए पकड़े गये। तस्करी की शिकायत पर आरपीएफ ने ट्रेन के जनरल कोच की जांच की। जांच के दौरान सीट के नीचे कपड़े के थैले में छिपाकर रखे गए 16 जीवित कछुए मिले। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन के धनबाद स्टेशन पर पहुंचने पर इंजन से सटे जनरल कोच के पास वाले कोच में सीट के नीचे नीले रंग के बैग में छिपा कर रखे गए कछुए उतारे गये। उन्हें वन विभाग को सौंप दिया गया। कछुए की तस्करी का तरीका भी पहले जैसा ही है। पहले भी बैग में छिपाकर सीट के नीचे कछुए रख दिए गए थे। दूर से उसकी निगरानी की जा रही थी ताकि पोल खुलने पर तस्कर पकड़ा न जाए। इस बार का तरीका भी ठीक वैसा ही था।
बरामद कछुए फ्लैप सेल प्रजाति हैं जो मीठे पानी में पाए जाते हैं। इससे पहले पकड़े गए कछुए भी इसी प्रजाति के थे। मीठे पानी के कछुओं का पश्चिम बंगाल में बड़ा कारोबार है। पूर्व में पकड़े गए पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के राम दास और उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर के रहने वाले हिमांशु वैध ने इसका खुलासा भी किया था। बताया था कि 24 परगना के कारोबारी को कछुए बेचते हैं।
राम दास और हिमांशु ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहने वाले मूसहर लोगों से 120 केजी कछुआ खरीदते हैं। उन्हें ट्रेन से पश्चिम बंगाल ले जाकर ऊंचे दामों में बेच देते हैं। हालांकि जीवित कछुए किस काम में उपयोग किए जाते हैं, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी।




