अबीर-गुलाल से नहीं ब्रज में जूतों से मार-मारकर खेली होली
Holi was not played with abir-gulal in Braj but by hitting with shoes

- ब्रज में खेली जाती है जूता मार होली, अनोखी परंपरा है
- वछगांव में बड़े छोटे को जूता मारकर देते हैं होली की शुभकामनाएं
- गुलाल के साथ जूते का आशीर्वाद, सदियों पुरानी है यह परंपरा
मथुरा/उत्तर प्रदेश। आपने रंग की होली, लट्ठमार होली, कपड़ा फाड़ होली सुनी देखी होगी, लेकिन क्या आपको पता है कि एक जगह ऐसी भी हैं, जहां जूता मार होली भी खेली जाती है। सुनकर आपको थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन ब्रज की होली का एक अपना ही अगल अंदाज है। यहां के लोग अपने से कम उम्र के लोगों को जूता चप्पल मार कर होली की शुभकामनाएं देते हैं।मथुरा की रंगीली होली, लट्ठामार होली और कपड़ा फाड़ होली तो विख्यात है। इसके अलावा अगर हम आपको ये कहें कि ब्रज में जूत मार कर भी होली खेली जाती है, तो आपको यकीन नहीं होगा. लेकिन ये बिलकुल सही है। ब्रज होली की तमाम होली की तरह ही जूता मार होली की भी परम्परा सदियों से चली आ रही है। यहां एक-दूसरे को जूता मार कर भी होली खेली जाती है। मथुरा के गांव वछगांव में यह प्राचीन परम्परा हर वर्ष मनायी जाती है। यहां लोग होली के रंगीली होली के दिन एक-दूसरे के सिर पर जूता या चप्पल मारते हैं।
दरअसल, यह परम्परा यहां कई वर्षों से चली आ रही है। गांव में उम्र से बड़ा व्यक्ति अपने छोटे या फिर बराबर के व्यक्ति जूता चप्पल मारकर होली मनाते हैं। यह लोग भी इस अनोखी होली का भरपूर आनन्द लेते हैं। स्थानीय नागरिक योगेश कुंतल ने बताया कि सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। गुलाल वाले दिन यहां एक दूसरे को गुलाल लगाकर आशीर्वाद लिया जाता है।
रमेश ने बताया कि बड़े बुजुर्ग छोटे लोगों को आशीर्वाद स्वरूप जूते और चप्पलों से सिर पर मारकर देते हैं। वहीं, हेमंत ने बताया कि यहां पर हर व्यक्ति को इसी तरह से सत्कार किया जाता है। छोटे लोग बड़े लोगों को गुलाल लगाते हैं और बड़े बुजुर्ग उन्हें जूते मारकर आशीर्वाद देते हैं।




