दो दोस्तों ने महाकुंभ के लिए निकाला बेमिसाल तोड़, नहीं मिली कहीं भीड़

5 दिन में 700 किमी की यात्रा, खर्च मात्र 5 हजार रुपये

डोंगरगढ़/छत्तीसगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ चल रहा है। महाकुंभ में शामिल होने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपना रहा है। कोई ट्रेन से जा रहा है तो कोई अपनी गाड़ी से। लेकिन छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ के रहने वाले दो लड़कों ने महाकुंभ में शामिल होने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। अब इनकी चर्चा हो रही है। शुक्रवार को इनके गांव में इनका सम्मान किया गया है। ये दोनों डोंगरगढ़ के करेला गांव के रहने वाले हैं। इनका नाम निर्भय लिल्हारे और भेदुराम मंडावी है।इन दोनों ने 5 दिनों में 700 किलोमीटर की दूरी तय कर त्रिवेणी संगम में स्नान किया। दोनों लड़कों का उनके गांव वालों ने सम्मान किया है। वह एक सप्ताह पहले ही प्रयागराज से वापस अपने गांव आए हैं। दोनों लड़कों के साहसिक कार्य पर ग्रामीणों ने कहा कि ऐसा साहस भरा कदम उठाने वाले यह हमारे गांव के पहले युवा हैं। इनके कारण गांव के दूसरे लड़कों को भी प्रेरणा मिलेगी। इसी कारण से इनका सम्मान किया गया है।
ट्रेनों में भीड़ और सड़कों पर जाम के कारण इन युवाओं ने साइकिल से प्रयागराज जाकर गंगा स्नान करने का फैसला किया। इसके लिए यह युवा 24 जनवरी को अपने गांव से निकले और 30 जनवरी को उन्होंने प्रयागराज में गंगा स्नान किया। यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए निर्भय लिल्हारे ने बताया कि जब उन्होंने यात्रा शुरू तब उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं थी कि वह रात में कहां रूकेंगे और क्या खाएंगे। बस महाकुंभ में शामिल होने की इच्छा थी।
उन्होंने बताया कि हम दोनों ने इसी संकल्प के साथ यात्रा शुरू करने का मन मनाया। कपड़े, आवश्यक सामान और थोड़े पैसे लेकर साइकिल से निकल पड़े। यात्रा की शुरुआत में पहले दिन हमने करीब 130 किलोमीटर साइकिल चलाई और पंडरिया पहुंचे। यहां हम लोगों ने रात गुजारी उसके बाद हर दिन 100 किलोमीटर से ज्यादा साइकिल चलाते और जहां रात हो जाती वहीं हम लोग विश्राम कर लेते। उन्होंने बताया कि उन्हें यात्रा के दौरान कहीं भी भीड़ नहीं मिली।
उन्होंने बताया कि हमारी इस पूरी यात्रा का खर्च महज चार से पांच हजार रुपये ही था। जब हम लोग साइकिल से जा रहे थे तो रास्ते में लोगों का भी सहयोग मिला। हम लोग जहां-जहां पहुंचे वहां लोगों ने हमे रात में खाने और विश्राम करने के लिए जगह भी दी। उन्होंने बताया कि हम लोग करीब एक सप्ताह से ज्यादा समय तक प्रयागराज में रहे। गंगा की आरती में भी भाग लिया। उसके बाद वह फिर साइकिल से रवाना हुए और इसी सप्ताह अपने गांव पहुंचे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button