बुनकर महासंघ ने बुनकरों की समस्याओं को लेकर की प्रेसवार्ता
भारत सरकार से बुनकरों की समस्याओं का समाधान करने का किया आवाहन

नई दिल्ली। भारत में बुनकर समाज का एक समृद्ध इतिहास है। इनकी बुनाई कला विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें बनारसी साड़ी, चंदेरी, भागलपुरी सिल्क, पटोला, इक्कत जैसी उत्कृष्ट कृतियाँ शामिल हैं। बुनकरों का योगदान न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करता है, बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। फिर भी, बुनकर समाज को आज कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बुनकरों को उनकी मेहनत के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिल पाता। बड़े व्यापारी और बिचैलिये बुनकरों के उत्पादों को सस्ते दाम में खरीदकर ऊंचे दामों में बेचते हैं, जिससे बुनकरों की आय सीमित रहती है। बुनकर अक्सर कर्ज में डूब जाते हैं और उन्हें अपनी जीविका चलाना मुश्किल हो जाता है।कई बुनकर पारंपरिक करघों पर काम करते हैं, जिनकी उत्पादकता कम है। आधुनिक मशीनों और तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण वे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं।
बुनकर समाज एवं पिछड़ा वर्ग की समस्याओं के समाधान हेतु भारत सरकार का ध्यान केंद्रित करने के लिए राजधानी दिल्ली के उत्तरी पूर्वी दिल्ली जिला स्थित प्रेस क्लब में बुनकर महासंघ द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें भारत सरकार से बुनकर महासंघ के पदाधिकारीयों द्वारा बुनकर समाज एवं पिछड़ा वर्ग की समस्याओं के समाधान की मांग की गई। प्रेस वार्ता के दौरान बुनकर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रसाद पुरुषोत्तम पाखले ने कहा कि बुनकर समाज की समस्याएं जटिल और बहुआयामी हैं, लेकिन सही नीतियों और जागरूकता के माध्यम से इनका समाधान संभव है। यदि बुनकरों को उचित सम्मान, तकनीकी सहयोग और आर्थिक समर्थन दिया जाए, तो वे न केवल अपनी कला को जीवित रख पाएंगे, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने ने कहा कि बुनकरों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने की सुविधा के साथ आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए विशेष योजनाएं सरकार को बनानी चाहिए। इसके अतरिक्ति महाराष्ट्र मे बुनकर समाज को 2 प्रतिशत एसबीसी प्रवर्ग आरक्षण की जगह तीन प्रतिशत आरक्षण मिले और वह आरक्षण केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा एवं उच्च नौकरी के लिए लागू होना चाहिये। विशेष प्रवर्ग मागासवर्ग आरक्षण जो एसबीसी से जाना जाता है वो आरक्षण केंद्र सरकार की नीतियों में लागू होना चाहिये।
बुनकर महासंघ के नई दिल्ली अध्यक्ष श्री नीरज कोष्ठा जी ने कहा कि बुनकर समाज का पिछडे वर्ग जनजातीय आयोग ने शिफारस की है कि उन्हे ओबीसी के रक्षण का लाभ मिले। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से कोई पहल नही हुई है। यह आरक्षण दिल्ली विधानसभा चुनाव सुरु होने से पहले लागू होना चाहिये तभी दिल्ली मे सभी बुनकर समाज और बुनकर व्यवसायिक जो कि दस लाख के ऊपर हैं वह भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में उतरेंगे।
प्रमुख समाजसेवी श्रीमती संगीता बर्वे ने कहा कि मेरे बुनकर भाइयों की स्थिति को देखकर मन हमेशा विचलित होता था। उनका रहन-सहन और स्थिति निम्न स्तर की थी बुनकर समाज अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जैसे मध्य प्रदेश में गढ़वाल, कोस्टा, गोष्टी, कोरी, कोली आदि इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में देवांग, देवांगन आदि। बुनकर समाज छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात ,आंध्र प्रदेश, कर्नाटक सहित पूरे देश में करीब 10 करोड़ की संख्या में हैं। जो कि अलग-अलग कार्य कर रहे हैं। सामाजिक संगठनों के माध्यम से बुनकरों की समस्याओं से अवगत कराया गया है। कोरोना कल में में सूक्ष्म एवं लघु मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार एवं मुख्यमंत्री कार्यालय मध्य प्रदेश भोपाल में ज्ञापन दिया गया जिसका आज तक कोई स्थाई हल नहीं निकाला गया है। मेरा केंद्र एवं राज्य सरकारों से करबद्ध अनुरोध है कि इस समस्या का कोई स्थाई हल शीघ्र अति शीघ्र निकालने का कष्ट करें ताकि इन 10 करोड़ बुनकर समाज के परंपरागत व्यवसाय जो हमारे पूर्वजों की धरोहर है को आगे बढ़ाया जा सके। साथ ही भारत सरकार एवं राज्य सरकारों से निवेदन है कि इस कार्य को तकनीकी प्रशिक्षण देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कपड़ा तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करें एवं बाजार उपलब्ध कारण और उच्च गुणवत्ता के कपड़ों का रोजगार के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही खड़ी ग्रामोद्योग के माध्यम से भी यह कार्य किया जा सकता है जिससे नवयुवक युति महिलाएं पुरुष एवं बुनकर तथा आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों को आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। जहां एक साड़ी बनाने में एक दिन लगता है वही पैठनी साड़ी कांजीवरम या बनारसी साड़ियों को बनाने में एक माह तक का समय लग जाता है ऐसी स्थिति में बुनकर परिवार क्या करेगा क्योंकि मजदूरी कार्य पूर्ण होने पर मिलेगी भरण पोषण परिवार का गुजारा वह कैसे करेगा इसी प्रश्न पर ध्यान आकर्षित करते हुए मैं राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार से अनुरोध कर रही हूं कि बुनकरों का कुछ स्थायित्व तकनीकी रूपेण उद्योग जो कि परंपरागत और पूर्वजों की धरोहर है और भारत देश की इस कला को संजोकर रख सके।
बागलकोट, कर्नाटक के प्रमुख समाजसेवी एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉक्टर दद्देनवार ने कहा कि कर्नाटक, तामिळनाडू ,आंध्र प्रदेश, तेलंगना के बुनकर समाज के लोगों की आर्थिक मदद केंद्र सरकार को करना चाहिए जो राज्य सरकार से भी अलग हो एवं पुरे देश मे सभी बुनकर समाज के लिये एक देश एक बिजली दर के तहत सबसिडी मिलनी चाहिये, दुसरी बात एक देश एक व्यवसाय नीती के तहत बुनकर समाज को केंद्र सरकार व्यवसाय के लिए कम व्याजदर और कम कागजी करवाही के आर्थिक सहाय्यता उपलब्ध करवाये। कर्नाटक के बेलगाम के बुनकर व्यवसायी अर्जुन कुंभार के नेतृत्व में कर्नाटक विधानसभा पर बुनकर समाज के लोग आंदोलन कर रहे हैं। उनपर जो फर्जी मुकदमें दर्ज किए गए हैं वह तत्काल वापस लिए जाएं। बिजली दर की पचास करोड़ की सबसिडी की मांग है उसे भी केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार तुरंत पुरी करे। महिला बुनकरों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष ऋण और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएँ।इन कदमों के माध्यम से बुनकर समाज की समस्याओं का समाधान कर उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाया जा सकता है। प्रेस वार्ता के दौरान देश के कई राज्यों से आए बुनकर समाज के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के समक्ष अपने-अपने विचार एवं मांगे रखी। इस अवसर पर कई वरिष्ठ समाजसेवी एवं गणमान्य पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।





