मिजोरम, धर्म और चर्च बचाने के लिए ज्यादा बच्चे पैदा करो, बैप्टिस्ट चर्च ऑफ मिजोरम ने दी सलाह

To save Mizoram, religion and church, have more children, Baptist Church of Mizoram advised

इंफाल/एजेंसी। मिजोरम में दूसरा सबसे बड़ा चर्च बैप्टिस्ट चर्च ऑफ मिजोरम (बीसीएम) बच्चों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहा है। बीसीएम ने ईसाइयों को ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह दी है। इसके अलावा उन्हें इसके फायदे भी बताए हैं। चर्च की ओर से कहा गया है कि अगर वे ज्यादा बच्चे पैदा करेंगे तो इससे मिजोरम और धर्म दोनों को फायदा होगा। बीसीएम की सबसे बड़ी कमिटी 129वीं असेंबली ने यह फ़ैसला लिया है। इस असेंबली ने शादीशुदा जोड़ों से ज़्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की है। इससे पहले मिज़ोरम प्रेस्बिटेरियन चर्च ने भी यही बात कही थी।
असेंबली के सदस्यों ने एक अजेंडा पास किया और सदस्यों ने कहा, ‘अगर मिज़ोरम की आबादी घटती रही तो यह बहुत बड़ी मुसीबत होगी। इससे समाज, राज्य, धर्म और चर्च, सबको नुकसान होगा। हमें आबादी बढ़ाने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा।’
इसके अलावा, असेंबली ने नशे और एचआईवी/एड्स जैसी समस्याओं से लड़ने का भी फ़ैसला किया है। इन समस्याओं की वजह से राज्य में बहुत से युवाओं की मौत हो रही है। भ्रष्टाचार और दूसरी सामाजिक बुराइयों से भी लड़ने की बात कही गई है। हर स्थानीय चर्च में इन समस्याओं से निपटने के लिए कमिटी बनाने का फ़ैसला लिया गया है। रिटायर हो चुके बैप्टिस्ट चर्च के पादरियों के राजनीति में जाने पर रोक लगाने का एक प्रस्ताव असेंबली ने ठुकरा दिया। ये पादरी पहले भगवान और चर्च की सेवा करने की कसम खा चुके होते हैं। हालांकि, असेंबली के सदस्यों ने माना कि लोग मानते हैं कि जनता के लिए काम करने का वादा करने वाली राजनीतिक पार्टियां भी अपने वादे पूरे नहीं करतीं।
इससे पहले, बीसीएम ने मिज़ोरम कोहरान हरुएतुते कमिटी (एमकेएचसी) छोड़ने का फ़ैसला किया था। एमकेएचसी, 16 बड़े चर्चों के नेताओं का एक समूह है। बीसीएम ने मिज़ोरम प्रेस्बिटेरियन चर्च के नेतृत्व वाले मिज़ोरम पीपुल्स फ़ोरम (एमपीएफ) में शामिल होने का न्योता भी ठुकरा दिया था। एमपीएफ चुनावों पर नज़र रखने वाला एक संगठन है, जिसमें कई सामाजिक संस्थाएं शामिल हैं।
बीसीएम का मानना है कि बढ़ती आबादी से मिज़ोरम का भविष्य सुरक्षित रहेगा। चर्च के अनुसार, ज़्यादा बच्चे होने से धार्मिक समुदाय भी मज़बूत होगा। यह फ़ैसला उस समय आया है जब मिज़ोरम में जनसंख्या वृद्धि दर कम हो रही है। बीसीएम की यह पहल समाज में बहस का विषय बन सकती है। कुछ लोग इसे सही मानेंगे तो कुछ लोग इसके ख़िलाफ़ भी होंगे। देखना होगा कि बीसीएम का यह कदम कितना कारगर साबित होता है और इसका मिज़ोरम के समाज और राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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