गाजियाबाद में अब तक केवल एक महिला सांसद, 45 फीसदी आबादी के बाद भी ऐसी उपेक्षा क्यों?

गाजियाबाद ब्यूरो। बेशक नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में महिलाओं के लिए संसद और राज्य की विधानसभाओं में आरक्षण के लिए कानून पास किया हो, दिल्ली ने कई महिला सांसद दी हों, लेकिन बगल में मौजूद गाजियाबाद की स्थिति उलट है। यहां देश की आजादी के बाद हुए 17 लोकसभा चुनाव में मात्र एक ही बार कमला चौधरी के रूप में महिला नेता सांसद बनी हैं। जबकि यहां महिला मतदाताओं की संख्या करीब 45 फीसदी है, जो हर चुनाव में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं। गाजियाबाद क्षेत्र से लोकसभा में पहुंचने वाले सांसदों का इतिहास देखें तो हापुड़ संसदीय क्षेत्र के रूप में 1957 में कांग्रेस के टिकट पर कृष्ण शर्मा चुनाव जीते थे। इसके बाद 1962 में कांग्रेस की टिकट पर कमला चौधरी जीतीं, 1967 में निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश वीर शास्त्री जीते। 1971 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बीपी मौर्य जीते।
हापुड़ सीट से 1977 में जनता पार्टी से कुंवर मोहम्मद अली खान ने जीत दर्ज की। 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर के अनवार अहमद जीते। 1984 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से केदारनाथ सिंह और 1989 में जनता दल से केसी त्यागी ने जीत दर्ज की। 1991, 1996 1998 और 1999 में लगातार चार बार बीजेपी के टिकट पर डॉ. रमेश तोमर जीते। 2004 में कांग्रेस से सुरेंद्र प्रकाश गोयल जीतकर सांसद बने। हालांकि, 2008 में परिसीमन के बाद गाजियाबाद संसदीय क्षेत्र अस्तित्व आने पर यहां से 2009 के चुनाव में बीजेपी से राजनाथ सिंह जीते। 2014 और 2019 में बीजेपी के टिकट पर रिटायर्ड जनरल वीके सिंह यहां से सांसद बने।
राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि गाजियाबाद बेशक दिल्ली के नजदीक है लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में यहां महिलाओं की भागीदारी अब भी कम है। यही कारण है की लोकसभा क्षेत्र के लिए टिकट मांगने वाले अधिकांश पार्टियों में महिला दावेदारों की संख्या कम ही रहती है। कांग्रेस ने 1998 के चुनाव में यह रीता सिंह को चुनाव लड़वाया था। जबकि 2019 कांग्रेस से ही डॉली शर्मा चुनाव मैदान में उतरी थीं, लेकिन वह जीत नहीं पाई थीं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री रहे बालेश्वर त्यागी कहते हैं कि गाजियाबाद एक बड़ा क्षेत्र ग्रामीण होने के कारण महिलाएं लोकसभा क्षेत्र की राजनीति करने में सक्रिय नहीं हो पाईं। जिन क्षेत्रों में महिलाएं ग्राम प्रधान, जिला पंचायत और नगर पालिका में जनप्रतिनिधि चुनी भी गई वहां भी अधिकांश के पति ही उनका कार्य कर रहे हैं। हालांकि पिछले करीब 10 वर्षों में बदलाव आया है और महिलाएं राजनीति में सक्रिय हुई है। जब तक सभी राजनीतिक दल महिलाओं को राजनीति में आने पर गंभीरता से विचार नहीं करेंगे बदलाव नहीं आ पाएगा।
गाजियाबाद में मतदाताओं की संख्या

  • कुल -29,38,845
  • पुरुष-16,22,869
  • महिला-13,15,782
  • ट्रांस जेंडर-194

‘महिलाओं को खुद आगे आना होगा’

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉली शर्मा का कहना है जब तक महिलाएं अपना हक लेने के लिए खुद ही आगे नहीं बढ़ेंगी तब तक उनका उन्हें अधिकार नहीं मिलेगा। चाहे वह लोकसभा चुनाव हो या किसी भी अन्य क्षेत्र में भागीदारी हालांकि कांग्रेस इस मामले में महिलाओं को आगे लाने में अग्रणी रही है। एक बार कांग्रेस ने की ही टिकट पर महिला को सांसद बनाने का मौका दिया। इसके बाद भी चाहे वह रीता सिंह या खुद मुझे (डॉली शर्मा) एक बार मेयर और उसके बाद लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट प्रदान किया। डॉली शर्मा ने कहा कि ऐसे ही जब तक सभी राजनीतिक दल इस मामले में गंभीर नहीं होंगे तब तक महिलाओं को उनका हक नहीं मिलेगा। जब तक महिलाएं प्रमुख पदों पर नहीं पहुंचेगी तब तक महिलाओं की समस्याओं का भी समाधान भी होना संभव नहीं होगा।

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