आतंकी हमले को भुला रहा पहलगाम, घाटी में लौटी रौनक, नए साल से पहले बढ़ी पर्यटकों की संख्या

श्रीनगर/एजेंसी। 22 अप्रैल 2025 की तारीख को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। क्योंकि इस दिन कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 मासूम लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। घटना के बाद ऑपरेशन सिंदूर हुआ और कश्मीर के स्थानीय लोगों पर भी सवाल उठे। इस दर्दनाक घटना के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में कमी देखने को मिली थी। हालांकि आठ महीनों बाद फिर से घाटियों में रौनक लौट आई है। नया साल मनाने के लिए पर्यटकों की भीड़ पहलगाम में दिख रही है।
पहलगाम पहुंचे पर्यटकों में से एक दीक्षा नाम की टूरिस्ट ने बताया कि कश्मीर के लोग बहुत अच्छे हैं और वे पहली बार कश्मीर आई हैं। उन्होंने कहा कि मैं हरियाणा के हिसार से आई हूं। कश्मीर में यह मेरा पहला अनुभव है और यह सचमुच बहुत सुंदर है। यहां सुरक्षा व्यवस्था बहुत अच्छी है और हम नव वर्ष मनाने आए हैं। कश्मीरी लोगों का पूरा सहयोग मिल रहा है और वे हर छोटी मदद करने के लिए तैयार हैं।
दीक्षा के पति गौतम ने बताया कि पहलगाम, सोनमर्ग और गुलमर्ग में भारी बर्फबारी हुई है और कश्मीर की वादियां किसी को भी आकर्षित कर सकती हैं। बहुत सारे लोग दूर-दूर से घूमने के लिए पहुंच रहे हैं। व्यवस्था भी बहुत अच्छी है। हम यहां अच्छी यादें संजोने के लिए आए हैं।
एक अन्य पर्यटक ने बताया कि वे तीसरी बार पहलगाम आए हैं और अब पहले से माहौल अच्छा हो गया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग बहुत सपोर्टिव हैं और हर तरह की मदद कर रहे हैं। उनका बोलने का लहजा बहुत प्यारा है। नए साल को देखते हुए देश के अलग-अलग राज्यों से पर्यटक बर्फबारी का मजा लेने के लिए कश्मीर पहुंच रहे हैं और सुंदर वादियों के नजारों का लुफ्त उठा रहे हैं।
पहलगाम हमले के बाद जम्मू और कश्मीर के पर्यटन पर बड़ा प्रभाव पड़ा था। जम्मू और कश्मीर का मुख्य व्यवसाय ही पर्यटन है, जहां की दुकानों से लेकर होटल पर्यटकों के आने पर चलते हैं। ऑफ सीजन में स्थानीय लोगों की कमाई कम होती है, लेकिन बर्फबारी के सीजन में घाटी और स्थानीय लोगों के चेहरों पर मुस्कान आ जाती है।

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