रिम्स के थर्ड ग्रेड कर्मी अफसर अली ने बेची 500 करोड़ की जमीन, शार्गिद बुलाते हैं ‘राजा साहब’

रांची,(एजेंसी)। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने रांची में जमीन की अवैध खरीद-बिक्री मामले में बड़ी कार्रवाई की है। फर्जी कागजात बनाकर और मूल दस्तावेज में छेड़कर अरबों रुपए की जमीन की खरीद-बिक्री की गई है। इसमें सेना की जमीन के अलावा आदिवासी और सरकारी जमीन की भी अवैध तरीके से खरीद-बिक्री की बात सामने आई। ईडी की छापेमारी में जो शुरुआती जानकारी मिली है, उसके अनुसार रिम्स रांची में कार्यरत थर्ड ग्रेड कर्मचारी अफसर अली ने पश्चिम बंगाल में फर्जी दस्तावेज बनाकर रांची में 500 करोड़ रुपए की जमीन बेच दी। थर्ड ग्रेड कर्मचारी अफसर अली का इतना दबदबा था कि लोग उसे ‘राजा साहब’ के नाम से बुलाते थे।

सेना की जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री

जांच अधिकारियों को जानकारी मिली है कि रांची में बरियातू रोड में सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री हुई। इस जमीन का बाजार वैल्यू करीब 150 करोड़ रुपए है। लेकिन सरकारी वैल्यू मात्र 20 करोड़ बताकर स्टांप और कोर्ट फीस देकर रजिस्ट्री कराई गई। इसी तरह से रिम्स कम्युनिटी हॉल के पीछे एक एकड़ आदिवासी खाते की जमीन को 10 करोड़ में बेची गई। इसकी भी कीमत करीब 200 करोड़ रुपए है। जमीन कारोबारी शुभाशीष मुखर्जी, गंगा विश्वकर्मा और शेखर कुशवाहा पर भी पिछले साल अपराधियों ने गोली चलाई थी। इसमें मुखर्जी और विश्वकर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने दो अपराधियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में दोनों शूटरों ने अफसर अली का नाम लिया था।

कोलकाता में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की खरीद-बिक्री

ईडी अधिकारियों के अनुसार अफसर अली रिम्स में रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में थर्ड ग्रेड कर्मचारी है। फिलहाल वह बरियातू मिल्लत कॉलोनी में रहता है। रिम्स में काम करने के बावजूद उसका मूल धंधा कोलकाता से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की खरीद-बिक्री करना है। अफसर ने कोलकाता में आजादी से पहले का फर्जी दस्तावेज बनाकर रांची में 500 करोड़ रुपए से अधिक की जमीन बेच दी। जिस जमीन पर उसकी नजर पड़ी, उसके फर्जी दस्तावेज कोलकाता में तैयार कराए। फिर रांची के अफसरों को मोटा कमीशन देकर जमीन पर कब्जा कराने के साथ रजिस्ट्री और म्यूटेशन भी कराया।

ईडी ने सात लोगों को हिरासत में लिया

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार देर रात भारतीय सेना भूमि घोटाले के सात संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। इनमें प्रदीप बागची, भानु प्रताप, अफसर अली, इम्तियाज खान, तल्हा खान, फैयाज खान और मोहम्मद सद्दाम शामिल हैं। पूछताछ के बाद इन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किए जाने की संभावना हैं। ईडी के अधिकारियों ने आईएएस छवि रंजन समेत कई अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और जमीन कारोबारियों के ठिकाने पर छापेमारी की थी। ईडी को जानकारी मिली है कि रांची में दो साल से अधिक समय तक उपायुक्त रहने के दौरान छवि रंजन ने जमीन के अवैध खरीद-बिक्री में मदद पहुंचाई। छवि रंजन का पिछले साल जुलाई महीने में रांची उपायुक्त पद से तबादला कर दिया था। जिसके बाद उन्हें समाज कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर पदस्थापित किया गया है।
रांची के अलावा कई अन्य शहरों में भी छापेमारी

ईडी ने जमीन घोटाले में रांची के अलावा जमशेदपुर, हजारीबाग और सिमडेगा में भी छापेमारी की। सिमडेगा में ईडी ने अंचल निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के घर पर छापा मारा। भानु प्रताप बड़गाई अंचल में अंचल निरीक्षक के पद पर कार्यरत है। भ्रष्टाचार के मामले में वह पहले भी जेल जा चुका है और अभी जमानत पर हैं। वहीं हजारीबाग के मेरू में भरत प्रसाद के घर और एसबीआई के कॉमन सर्विस सेंटर पर भी छापेमारी की गई। बताया गया है कि भारत प्रसाद का पुत्र पंकज कुमार एसबीआई का सीएससी है। इसके साथ ही वह कोयले के धंधे से भी जुड़ा है। जमशेदपुर में कदमा स्थित आवास में छवि रंजन के फ्लैट में भी छानबीन गई। छवि रंजन के मास्टर बेडरूम के फ्लैट के अंदर स्पेशल सेफ्टी लॉक था, तीन अलग-अलग दरवाजे होने की बात कही जा रही है।

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