दीवारों पर दरारें, सांप और बिच्छू का खतरा…जनता को सुरक्षा प्रदान करने वाली हिमाचल पुलिस खुद सुरक्षित नहीं

ऊना,(हिमाचल प्रदेश)। सन 1865 से बना ऊना सदर थाने का भवन बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुका है। हालत यह है कि किसी भी प्रकार की आपदा आने पर लोगों की सुरक्षा को निश्चित करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की अपनी सुरक्षा अनिश्चितता के घेरे में आ चुकी है। थाना परिसर में कई जगहों पर दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आर पार का नजारा साफ तौर पर दिखाती हैं। बेहद दयनीय हालत में पहुंच चुके इस बेहद पुराने भवन में पुलिस कर्मचारियों को न सिर्फ ड्यूटी करने को मजबूर होना पड़ता है बल्कि उनका रहना और खाना भी हर वक्त खतरे के साए में होता है।

दरारों से आते हैं सांप बिच्छू

दरारों से आते हैं सांप बिच्छू

इन्हीं दरारों से होकर कई बार सांप-बिच्छू जैसे विषैले जीव पुलिस कर्मचारियों के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। शहर के बीचो-बीच यह बेहद पुराना भवन इस्तेमाल के बावजूद लगातार खंडहर बनता जा रहा है। कई साल पहले थाना के नए परिसर का निर्माण करने के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई थी लेकिन अभी तक उस भूमि पर निर्माण कार्य ही शुरू नहीं हो पाया।
रसोई और बैरक हो चुकी है खंडहर

रसोई और बैरक हो चुकी है खंडहर

दूसरी तरफ वर्तमान थाना परिसर में मरम्मत तक नहीं की जा सकी है। थाना परिसर की कारागार, पुलिस कर्मचारियों की रसोई और उनकी बैरक पूरी तरह खंडहर हो चुकी है और कभी भी किसी बड़े हद से का सब बन सकती है। थाना परिसर एक ऐसी जगह हैं जहां पर हर वक्त पुलिस कर्मचारी या फिर विचार अधीन कैदियों की मौजूदगी रहती है।

क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक

पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर का कहना है कि अधिकतर थाने और चौकियां निजी भवनों में किराए पर चल रहे हैं। जबकि थाना सदर का काम अंग्रेजों के ज़माने के भवन में चलाया जा रहा है।
नए भवन का किया जाएगा निर्माण

नए भवन का किया जाएगा निर्माण

समय के साथ ही भवन काफी जर्जर बन चुका है। सदर थाना के नए परिसर के निर्माण के लिए जगह का चयन किया जा चुका है। जल्द ही नए भवन का निर्माण कर इसे शिफ्ट भी किया जाएगा।

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