मिस्र में पुरातत्विदों को मिली भेड़ों की ममी, जमीन के नीचे दफन थे 2000 से ज्यादा सिर

काहिरा,(एजेंसी)। मिस्र में पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने रविवार को कहा कि पुरातत्वविदों ने 2000 से ज्यादा प्राचीन ममीकृत भेड़ के सिर खोजे हैं। इन भेड़ों को फिरौन रामसेस II के मंदिर में चढ़ावे के रूप में छोड़ा गया था। इससे पहले अमेरिकी पुरातत्वविदों की टीम ने दक्षिणी मिस्र के अबिडोस में मंदिरों और मकबरों से कुत्तों, बकरियों, गायों और नेवले की ममी भी खोद कर निकाली हैं। इस टीम के प्रमुख समीह इस्कंदर ने कहा रामसेस द्वितीय से जुड़े एक पंथ को मानने वालों ने उसकी मौत के 1000 साल बाद इन भेड़ों को चढ़ाया था।
रामसेस द्वितीय ने 1304 से 1237 ईसा पूर्व तक यानी लगभग सात दशकों तक मिस्र पर शासन किया। मिस्र के पुरावशेष परिषद की प्रमुख मुस्तफा वजीरी ने कहा कि इस खोज से लोगों को रामसेस द्वितीय के मंदिर, यहां होने वाली एक्टिविटी और इसके निर्माण के बारे में जानकारी मिल सकेगी। ममीकृत जानवरों के अवशेषों के साथ-साथ पुरातत्वविदों को करीब 4000 साल पुरानी एक पांच मीटर मोटी दीवार वाले महल के अवशेष भी मिले हैं।
पुरातत्वविदों को यहां मूर्तियां, पपाइरी, प्राचीन पेड़ों के अवशेष, चमड़े के कपड़े और जूते भी मिले हैं। अबिडोस नील नदी के पास काहिरा के दक्षिण में 435 किमी दूर है। काहिरा नियमित रूप से नई पुरातात्विक खोजों की घोषणा करता है। इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक या ऐतिहासिक महत्व की तुलना में राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव के लिए अधिक किया जाता है। मिस्र में 10.5 करोड़ लोग रहते हैं। यहां जीडीपी का 10 फीसदी हिस्सा पर्यटन से आता है, जिससे 20 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन मिस्र इस समय एक बड़े आर्थिक संकट को झेल रहा है। मिस्र का लक्ष्य है कि 2028 तक हर साल 3 करोड़ पर्यटकों को आकर्षित किया जाए। कोरोना महामारी से पहले यह संख्या 1.3 करोड़ थी।

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