तरनतारन फेक एनकाउंटर में 32 साल बाद इंसाफ, एसएसपी समेत पांच पुलिस अफसरों को उम्रकैद

तरनतारन/पंजाब। 1993 के तरनतारन फर्जी मुठभेड़ मामले में 32 साल बाद इंसाफ मिला है। सीबीआई की विशेष अदालत, मोहाली ने पूर्व एसएसपी, पूर्व डीएसपी सहित पांच पूर्व पुलिस अधिकारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने इन्हें आपराधिक साजिश, हत्या, सबूत मिटाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया।
उम्रकैद की सजा पाने वालों में पूर्व एसएसपी भूपिंदरजीत सिंह, पूर्व डीएसपी दविंदर सिंह, पूर्व इंस्पेक्टर सुबा सिंह, पूर्व एएसआई गुलबर्ग सिंह और पूर्व एएसआई रघुबीर सिंह शामिल हैं। अदालत ने इन सभी को फर्जी मुठभेड़, हत्या, आपराधिक साजिश और सबूत नष्ट करने जैसे गंभीर अपराधों का दोषी पाया। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।
27 जून से 28 जुलाई 1993 के बीच तरनतारन जिले में सात लोगों को पुलिस ने अगवा किया और फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया। इनमें से तीन लोग विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) थे—शिंदर सिंह, सुखदेव सिंह और देसा सिंह।
पुलिस ने दावा किया कि ये एसपीओ सरकारी हथियार लेकर फरार हो गए थे। इसके बाद मुठभेड़ में मारे जाने की कहानी बनाई गई। शवों को बिना पहचान बताए गुमनाम घोषित कर अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि दस्तावेजों में पहले ही इनकी पहचान हो चुकी थी।
सीबीआई ने 2002 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में यह साफ हुआ कि पीड़ितों को जबरन अगवा किया गया, थाने में उनकी बेरहमी से पिटाई की गई और फिर झूठे आरोप लगाकर फर्जी एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद मुठभेड़ का नाटक रचकर उन्हें मार डाला गया। पुलिस अधिकारियों ने सबूतों से छेड़छाड़ की और रिकॉर्ड में हेरफेर कर मामला दबाने की कोशिश की। 2010 से 2021 के बीच केस की सुनवाई लंबित रही और इस दौरान पांच आरोपियों की मौत हो गई।




