जम्मू-कश्मीर बजट में पर्यटन के लिए कोई आवंटन नहीं

कश्मीर ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ने जताई आपत्ति

श्रीनगर/एजेंसी। कश्मीर ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन (टीएएके) ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए बजट में पर्यटन क्षेत्र के प्रति दिखाई गई स्पष्ट उदासीनता पर कड़ी आपत्ति जताई है। एक बयान में, टीएएके के अध्यक्ष फारूक ए. कुठू ने पर्यटन के लिए किसी भी पर्याप्त आवंटन के अभाव पर आश्चर्य व्यक्त किया, जबकि र्पयटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी घटना के बाद घाटी ने अपने पर्यटन इतिहास में सबसे बड़े झटकों में से एक का सामना किया, जिससे उद्योग पूरी तरह ठप हो गया। कुठू ने कहा, ऐसे नुकसान के बावजूद, पर्यटन हितधारकों के लिए कोई राहत पैकेज या वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं की गई है जोकि बहुत ही निराशाजनक है।
कश्मीर फल उत्पादक सह व्यापारी संघ (केवीएफजी), ने जम्मू-कश्मीर बजट 2026-27 पर मिली-जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ ने सेब के लिए समर्पित फसल बीमा योजना की शुरुआत का स्वागत करते हुए कहा कि अनसुलझे कर्ज और आयात से होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण ‘अर्थव्यवस्था की रीढ़’ सेब अभी भी खतरे में है। उनके अनुसार फल बीमा योजना से सेब उत्पादकों को किसी हद तक राहत मिलेगी।
अलबत्ता यह योजना आडू, नाशपाति, चेरी व बेर के लिए भी होनी चाहिए। संघ ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री उमर अब्दुल्ला के सेब के लिए विशेष रूप से फसल बीमा योजना को मजबूत करने के निर्णय की सराहना की। संघ ने कहा,बीमा की शुरुआत बागवानों को अप्रत्याशित जोखिमों से बचाने के लिए एक सकारात्मक और बेहद जरूरी कदम है। लेकिन इसके अलावा भी इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए उचित उपायों की जरूरत है। संघ ने सरकार से आग्रह किया कि इस सुरक्षा जाल को चेरी, बेर, आड़ू, नाशपाती और बाबागोशा सहित अन्य महत्वपूर्ण फलों तक भी बढ़ाया जाए, जो वर्तमान में इसके दायरे से बाहर हैं। मोहम्मद इस्माईल बेग नामक एक फल उत्पादक ने कहा, सेब की तुलना में चेरी, बेर, आडू व नाशपाती की शेल्फ लाइफ बहुच कम होती है। यह चंद एक दिनों में ही खराब हो जाते हैं। ऐसे में सरकार को इन फलों का व्यापार करने वालों के लिए भी कोई योजना बना लेनी चाहिए ताकि फल उत्पाक नुकसान से बच सके।

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