कानपुर में फिर ट्रेन पलटाने की साजिश, गोविंदपुरी में ट्रैक पर सिलेंडर, 45 दिनों में चौथी घटना

Conspiracy to overturn train in Kanpur again, cylinder on track in Govindpuri, fourth incident in 45 days

  • कानपुर में रेल ट्रैक पर मिला फायर सेफ्टी गैस सिलेंडर, उठे कई सवाल
  • गैस सिलेंडर ट्रेनों में पत्ती से बंधे होते हैं तो ट्रैक पर कैसे गिरा, शुरू हुई जांच
  • पुष्पक एक्सप्रेस ने ट्रैक पर सिलेंडर देख लगाई इमरजेंसी ब्रेक, टला बड़ा हादसा
  • रेलवे की ओर से ट्रैक पर सिलेंडर गिरने की घटना की शुरू हुई जांच, कमिटी गठित

कानपुर/उत्तर प्रदेश। कानपुर में बड़ा हादसा होते-होते टल गया। गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर फायर गैस सिलेंडर पड़ा मिला। इसके बाद हड़कंप मच गया। रविवार सुबह मुंबई से कानपुर की ओर से आ रही 12534- पुष्पक एक्सप्रेस के चालक एसके भसीन की नजर गैस सिलेंडर पर पड़ी। उन्होंने इमरजेंसी पर ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। कंट्रोल को मैसेज किया। इसके बाद रेलवे महकमा इस घटना को लेकर हलचल में आ गया। ड्राइवर ने गैस सिलेंडर की खुद जांच की। इसमें पाया कि यह रेलवे सेफ्टी सिलेंडर है, जो ट्रेनों में आग से बचाव के इस्तेमाल में आता है। चालक ने सिलेंडर को अपने केबिन में रखा और कानपुर सेंट्रल पर आरपीएफ को सौंप दिया।गोविंदपुरी स्टेशन के पास ट्रैक पर गैस सिलेंडर पाए जाने की घटना को लेकर कानपुर रेलवे प्रशासन सतर्क हुआ है। रेलवे पुलिस और कैरिज एंड वैगन विभागों ने इसकी सूचना दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि पुष्पक एक्सप्रेस के पहले इधर से 22538-कुशीनगर एक्सप्रेस गुजारी थी। अंदाजा लगाया जा रहा है कि कुशीनगर एक्सप्रेस से ही यह गैस सिलेंडर गिरा होगा। यह ट्रेन गोरखपुर जाती है।
अब जांच इस बात की हो रही है कि सिलेंडर आखिर ट्रेन से कैसे गिरा? पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। इस बिंदु पर भी जांच हो रही है कि कहीं किसी यात्री ने शरारत में गैस सिलेंडर तो नहीं गिराया? यह बड़ा सवाल है। सवाल यह भी है कि शरारती तत्वों ने अगर सिलेंडर गिराया तो ट्रेन स्टाफ को इस संबंध में पता क्यों नहीं चल पाया? साथ ही, एनसीआर जोन में ही सिलेंडर को संयोग या फिर साजिश के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
कानपुर जोन की इन घटनाओं से टेंशन
16 अगस्त- झांसी रूट पर पनकी फैक्ट्री एरिया के सामने ट्रैक पर बोल्डर बांधा गया था। इससे साबरमती एक्सप्रेस के सभी डिब्बे डिटेल हो गए। घटना की जांच जारी है।
8 सितंबर- फर्रुखाबाद रेल मार्ग पर बर्राजपुर और उत्तरीपुरा स्टेशनों के बीच मुंडेरी गांव के सामने ट्रैक पर गैस सिलेंडर, पेट्रोल भरी बोतल और अन्य सामान बरामद किए गए। पुलिस और आईबी घटना की जांच कर रही है।
22 सितंबर- कानपुर सेंट्रल से फतेहपुर के बीच प्रेमपुर स्टेशन की लूप लाइन पर खाली गैस सिलेंडर रखा गया। ड्राइवर ने ट्रेन रोकी। घटना की जीआरपी जांच में नतीजा नहीं निकल पाया है।
29 सितंबर- गोविंदपुर स्टेशन की होल्डिंग लाइन पर रेल सेफ्टी गैस सिलेंडर मिला है। जांच के लिए कमेटी बनाई गई है।
पुष्पक एक्सप्रेस के चालक एसके भसीन के अनुसार, पुष्पक एक्सप्रेस भीमसेन से कानपुर सेंट्रल की तरफ जा रही थी। गोविंदपुर स्टेशन पहुंचने वाली ही थी कि 400 मीटर पर ट्रैक पर सिलेंडर दिखा। उन्होंने पहले बिना देरी किए ट्रेन रोकी। उस समय सुबह के 4:14 बज रहे थे। ट्रेन रोककर उन्होंने कंट्रोल को सूचना दी। इसके बाद सहायक चालक के साथ सिलेंडर को चेक किया तो सिलेंडर पर इश्यू होने की तारीख लिखी थी।
आरपीएफ ने कैरिज एंड बैगन विभाग को सिलेंडर दे दिया है। रेलवे ने सिलेंडर गिरने की सच्चाई जानने के लिए तीन सदस्य टीम गठित की है। कानपुर सेंट्रल के डिप्टी सीटीएम आशुतोष सिंह ने कहा कि सिलेंडर ट्रैक पर मिलने की संयुक्त जांच रिपोर्ट बनवाई जा रही है। अन्य जांच सुरक्षा बल और जिम्मेदार विभाग करेंगे। यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह सिलेंडर ट्रेन से कैसे गिरा?
रेलवे की विभागीय जांच में पता चला है कि गोविंदपुरी स्टेशन की होल्डिंग लाइन पर पड़ा मिला सिलेंडर गोरखपुर जोन से जारी हुआ। इस वजह से रेलवे अफसरों का मानना है कि इस ट्रैक से गोरखपुर जाने वाली किसी ट्रेन से ही सिलेंडर गिरा है। गोरखपुर कंट्रोल को मैसेज किया गया है, जिससे सही जानकारी हासिल की जा सके। ट्रेनों में आग जैसी किसी भी घटना से निपटने के लिए सेफ्टी सिलेंडर रखे जाते हैं। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में औसतन 22 से 24 सेफ्टी सिलेंडर रहते हैं। इसमें चालक केबिन में चार, गार्ड केबिन में दो और हर एसी कूपे में दो-दो सिलेंडर रखे रहते हैं। इन सिलेंडरों को पट्टी की क्लिप से बांधकर रखा जाता है।

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