16000 फीट ऊंचाई पर चीन बॉर्डर में बड़े स्तर पर पिघल रहा ग्लेशियर, झील के रास्ते अरुणाचल प्रदेश में आएगी तबाही?
Glacier melting on a large scale in China border at an altitude of 16000 feet, will there be devastation in Arunachal Pradesh through the lake?

इंफाल/एजेंसी। अरुणाचल प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां के तवांग जिले में सांगंगा नेहगु झील से आए ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के कारण बड़ा नुकसान हुआ है। यहां पांच से अधिक लॉग ब्रिज और ब्रोक्पा ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जीएलओएफ 14 अगस्त को हुआ था और इसकी पुष्टि तवांग के उपायुक्त कान्की दरंग और पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू थोंगोन की जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक टीम ने की। यह भी तब पता चला जब टीम झील तक गई थी।तवांग के जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों की एक टीम माउंट गोरीचेन रेंज पर ग्लेशियर के पास स्थित सांगंगा नेहगु झील पर पहुंची थी। टीम ने पाया कि 14 अगस्त को सांगंगा नेहगु झील में एक ग्लेशियल झील का विस्फोट हुआ था।
तवांग के डिप्टी कमिश्नर कांकी दरांग और पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू थोंगन के नेतृत्व में टीम ने पाया कि उसी झील से ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ की संभावना अभी भी बनी हुई है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि झील के पीछे की ओर ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहा है, जिससे झील में पानी की मात्रा बढ़ रही है। ब्रोक्पा के किए गए अनुरोध का जवाब डीसी ने दिया। उन्होंने कहा, ‘हाल ही में क्षतिग्रस्त ब्रोक्पा ट्रैक की मरम्मत और रखरखाव के लिए संयुक्त निधि से तुरंत 3 लाख रुपये मंजूर किए जाएंगे। बह गए पुलों के मामले को उच्च अधिकारियों के साथ उठाया जाएगा।’
तवांग जिला प्रशासन ने एक बयान में कहा कि टीम ने 20 अगस्त को जेथांग (13,200 फीट) से आगे बढ़ना शुरू किया। टीम मेराथांग (14,600 फीट) में एक रात के लिए रुकी। अगली सुबह, टीम ने चढ़ाई शुरू की और सांगंगा नेहगु झील (16,000 फीट) तक पहुंची। उसका सर्वेक्षण किया और शाम तक त्सो क्यी झील के रास्ते जेथांग लौट आई।
एक दूसरी टीम ने 20 अगस्त को त्सो क्यी झील (14,800 फीट) का दौरा किया और उसका सर्वेक्षण किया और उसी दिन जेथांग लौट आई। आपातकालीन बैकअप के लिए जेथांग में एक आईटीबीपी टीम तैनात की गई थी। 22 अगस्त को अपना मिशन पूरा करने के बाद टीमें सुरक्षित रूप से अपने-अपने मुख्यालय लौट आईं। विशेषज्ञ दल अरुणाचल प्रदेश के तवांग और दिबांग घाटी जिलों में छह हाई रिस्क वाली हिमनद झीलों में सर्वेक्षण और को स्टडी करने के लिए फैल गए हैं। यह इलाका चीन के साथ 1,080 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं।
यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) देश में सभी ग्लेशियल झीलों का मानचित्रण करने के लिए किया जा रहा है। इससे पूर्व चेतावनी सेंसर और अन्य शमन उपायों को स्थापित किया जा सकेगा। यह आकलन करने के लिए बड़े राष्ट्रीय जीएलओएफ मिशन का हिस्सा है। अरुणाचल प्रदेश में इसके रणनीतिक स्थान को देखते हुए इस काम पर कड़ी नजर रखी जाएगी। यह सीमावर्ती राज्य में ग्लेशियल झीलों का पहला ऐसा सर्वेक्षण भी है।
दोनों सर्वेक्षण जिले तवांग और दिबांग घाटी हैं। ये दोनों जिले चीन के साथ बॉर्डर शेयर करते हैं। 1962 के पहले कुछ समय के लिए यह इलाका चीन के नियंत्रण में रहा था। चीन ने अक्सर अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा किया है। अरुणाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने बताया कि अध्ययन में अक्टूबर 2023 में सिक्किम में देखी गई जीएलओएफ जैसी आपदा के प्रति संवेदनशील झीलों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके अलावा शमन उपायों का आकलन किया जाएगा।




