दिल्ली में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या निवासियों के खिलाफ जगह-जगह चली दिल्ली पुलिस की ड्राइव
Delhi Police's drive against illegal Bangladeshi and Rohingya residents in Delhi is going on everywhere

दिल्ली ब्यूरो। एलजी वीके सक्सेना का आदेश नॉर्थ वेस्ट जिले को छोड़कर दिल्ली के बाकी जिलों में लागू हो चुका है। अलग-अलग जिलों के हिस्सों में अवैध बांग्लादेशियों/रोहिंग्याओं के खिलाफ ड्राइव चल रही है। गुरुवार को इस ड्राइव का दूसरा दिन था। जिसमें पुलिस टीमें झुग्गियों और बांग्लादेशियों के संभावित जगहों पर जाकर संदिग्धों का नाम, पता, आधार कार्ड चेक कर रही हैं। इनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होगा।वहीं, नॉर्थ वेस्ट जिले में बांग्लादेशियों के अवैध ठिकाने को लेकर विवादों में रहे जहांगीरपुरी इलाके में दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की ड्राइव शुरू नहीं हुई। सूत्रों से पता चला कि जिले के आला अफसर की तरफ से ड्राइव को हरी झंडी न मिलने की वजह से लोकल पुलिस की टीमें जहांगीरपुरी, आदर्श नगर, महेंद्रा पार्क और अन्य संभावित बस्तियों में ड्राइव शुरू नहीं कर पाई। इस बाबत पूछे जाने पर डीसीपी अभिषेक धानिया ने कहा कि अभी ड्राइव अभी शुरू नहीं की है। इलेक्शन मीटिंग और अन्य जरूरी कामों में व्यस्तता है।
वहीं, दूसरी तरफ शाहदरा जिले के डीसीपी प्रशांत गौतम के सुपरविजन में एसएचओ देवेंद्र ओबरॉय और उनकी टीम ने सीमापुरी में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ ड्राइव चलाई। पुलिस ने गुरुवार को नई सीमापुरी की ई-44 झुग्गियों में अभियान चलाया। शाहदरा जिला डीसीपी की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, एलजी के निर्देशों के तहत अवैध घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें बाहर निकालने के लिए दो महीने की समय सीमा निर्धारित की है। पुलिस टीमों ने कई झुग्गियों का दौरा किया और वहां के निवासियों के पहचान दस्तावेजों की पुष्टि की। ड्राइव के दौरान 32 लोगों के दस्तावेज इकठ्ठा किए गए। जिसका वेरिफिकेशन उनके मूल एड्रेस पर किया जाएगा। साथ ही, निवासियों को नकली पहचान पत्र का इस्तेमाल करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सूत्रों ने बताया कि साउथ ईस्ट जिला पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे तीन बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया है। इनमें से एक को शाहीन बाग और दूसरे को निजामुद्दीन से पकड़ा है। तीसरे शख्स को अलग जगह से पकड़ा गया है। इन तीनों को सराय रोहिल्ला स्थित डिटेंशन केंद्र भेजा गया है। पुलिस ने बताया कि जमीन के मालिकों को हिरासत में लिया गया है। इन्होंने बिना वेरिफिकेशन के लोगों को किराये पर झुग्गी दी थी। पुलिस के लिए ये अपने आप में चुनौती साबित हो रहा है, क्योंकि पुलिस के पास पुख्ता डेटा नहीं है।
झुग्गी बस्तियों में पुलिस की टीम पहुंची, जिन्होंने लोगों से कई सवाल पूछे और वेरिफिकेशन करने की कोशिश की। जो लोग अपने दस्तावेज सत्यापन के लिए देने में असमर्थ दिखे या फिर जिनकी पहचान की पुष्टि नहीं हो पाई, ऐसे लोगों को पुलिस की टीम ने डिटेन किया जिनसे आगे पूछताछ की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि पहचान के लिए पुलिस की तरफ से जो सवाल किए जा रहे हैं उनमें आपका नाम क्या है, क्या काम करते हैं, कब और कहां पैदा हुए, कहां के रहने वाले हैं, दिल्ली में कब से रह रहे हैं, क्या यह किराये की झोपड़ी है, झोपड़ी नंबर क्या है, पिता का नाम, कितने पढ़े-लिखे हैं, शादी कब हुई, कितने बच्चे हैं- जैसे सवाल शामिल हैं।




