‘प्राइवेट पार्ट पकड़ना दुष्कर्म का प्रयास’, इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

प्रयागराज/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश पर पिछले दिनों खूब बहस हुई थी। हाई कोर्ट ने प्राइवेट पार्ट पकड़े जाने के मामले को दुष्कर्म का प्रयास मानने से इनकार कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि किसी युवती के निजी अंग को पकड़ना और नाड़ा खोलना दुष्कर्म के प्रयास का अपराध बनता है। सु्प्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। दरअसल, हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह ‘दुष्कर्म की कोशिश’ नहीं, बल्कि सिर्फ ‘तैयारी’ थी।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने की। पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद दिए गए फैसले में कहा, हाई कोर्ट ने तय आपराधिक कानून के सिद्धांतों का गलत इस्तेमाल और व्याख्या की है। पीठ ने मामले में कासगंज के विशेष जज की ओर से जून 2023 को आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत जारी किए गए दुष्कर्म के प्रयास के मूल समन को बहाल कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत ने फैसले में जो टिप्पणी की हैं, वे केवल शिकायतकर्ता की ओर से पेश मामले के प्रथम दृष्टया परिप्रेक्ष्य में की गई हैं।
पीठ ने साफ किया कि इन टिप्पणियों को आरोपियों की दोषसिद्धि को लेकर कोई राय नहीं समझा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि इस केस में लगे आरोपों को सरसरी तौर पर देखने पर भी रत्तीभर संदेह की गुंजाइश नहीं रहती कि आरोपियों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (रेप) के तहत अपराध करने के पूर्व निर्धारित इरादे से ये हरकतें कीं।
कासगंज विशेष जज (पॉक्सो अधिनियम) की अदालत में मामला आया था। दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि 10 नवंबर 2021 को शाम पांच बजे शिकायतकर्ता महिला 14 वर्षीय बेटी के साथ ननद के घर से लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में उसके गांव के ही तीन लोग उन्हें मिल गए। उन्होंने उसकी बेटी को बाइक से घर छोड़ने की बात कही। आरोप है कि आरोपियों ने रास्ते में लड़की के निजी अंग पकड़ लिए।
याचिका में आरोप लगाया गया कि मामले में तीन में से एक आरोपी आकाश ने लड़की को खींचकर पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की। इस दौरान लड़की का नाड़ा खींच दिया। पीड़िता की चीख सुनकर दो व्यक्ति वहां पहुंच गए। उन्हें देख आरोपी भाग गए। मामले में कासगंज विशेष जज की ओर से समन जारी किया गया।  आरोपियों के खिलाफ रेप के प्रयास का मामला बना। विशेष जज के की ओर से जारी समन के खिलाफ आरोपी हाई कोर्ट चले गए। वहां निजी अंग पकड़ने और नाड़ा खोलने को दुष्कर्म का प्रयास मानने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने कासगंज विशेष जज के समन को बहाल कर दिया है।

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