दिल्ली क्राइम ब्रांच ने किया चोरी की लग्जरी कारें बेचने वाले गैंग का किया भंडाफोड़

ऑनलाइन पोर्टलों को ऐसे बेची जाती थीं चोरी की एसयूवी, 20 गाड़ियां बरामद और 13 गिरफ्तार

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। क्राइम ब्रांच ने चोरी की लग्जरी कारें ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बेचने वाले गैंग का भंडाफोड़ करते हुए 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे 20 कारें बरामद हुई हैं। आरोपियों की पहचान जामिया नगर के अनवर कुरैशी उर्फ हाजी अनवर उर्फ साहिल (42), शहजाद खान (33), साहिल उर्फ शहीक (26), तुगलकाबाद एक्सटेंशन के मोहम्मद रियाज (27), नोएडा सेक्टर-106 के किशन कुमार (31), यूपी रामपुर के विकास कुमार मिश्रा (29), शाहीन बाग के मोहम्मद अल्ताफ (32), जगतपुरी साउथ अनारकली के पुरु सिंह (24), कटवारिया सराय के जयंत कुमार (42), फरीदाबाद के कुंदन गिरी (29), जैतपुर एक्सटेंशन के नौशाद (37), मेरठ के मोहसिन खान (54) और तेखंड गांव निवासी ब्रजेश कुमार उर्फ संजीव कुमार (30) के रूप में हुई है। गिरोह अब तक करीब 50 कारें बेच चुका है।स्पेशल सीपी (क्राइम) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अडिशनल सीपी संजय भाटिया और डीसीपी संजय कुमार सैन की देखरेख में एसीपी रोहिताश कुमार और इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की टीम बनाई गई थी। टीम ने लंबी तफ्तीश के बाद गिरोह को पकड़ा। यह गिरोह कार्स24 और कारदेखो पोर्टल के जरिए इन कारों को बेचता था। गैंग गाड़ियों के फर्जी दस्तावेज बनाता था। फर्जी नाम से बैंक खाते खोलता था। इंजन और चेसिस नंबर टेंपर करता था। इससे पहले आरोपी चोरी की गई कार जैसे मॉडल और कलर वाली कारों को ऑनलाइन पोर्टल पर खोजते थे। इसके जरिए उस गाड़ी के मालिक की सूचना और गाड़ी की डिटेल निकलवाई जाती थी। इसके बाद उसी शख्स के नाम पर चोरी की गाड़ी के दस्तावेज तैयार होते थे और बैंक खाता खोला जाता था। इसके बाद उसी गाड़ी का चेसिस और इंजन नंबर इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद चोरी की इन गाड़ियों को नई पहचान देकर बेच दिया जाता था।
पुलिस टीम ने गुजरात नंबर की चोरी की हुंडई क्रेटा के साथ अनवर कुरैशी को मयूर विहार फेस-1 मेट्रो स्टेशन के करीब दबोचा। इससे दो फोन मिले, जिनमें 41 संदिग्ध गाड़ियों और 21 फर्जी बैंक खातों का डेटा मिला। ऑर्गनाइज्ड सिंडिकेट की तरफ संकेत करते कई संदिग्ध वॉट्सऐप चैट भी मिली। इसके बाद 6 अगस्त को पुरु सिंह और इसके साथी जयंत कुमार जेना को आनंद विहार आईएसबीटी के करीब से पकड़ा गया, जो फर्जी नंबर प्लेट की चोरी की कार को कार्स24 में बेचने की कोशिश कर रहा था।
अनवर कुरैशी ने पुलिस को बताया कि इंदौर निवासी दानिश के कहने पर बिजनौर के शादाब के साथ चोरी की गाड़ियों की खरीद-फरोख्त का काम शुरू किया था। ऑनलाइन पोर्टल के काम करने के तरीके को खंगाला। इससे पता चला कि कार के मालिक के खाते में ही पैसा ट्रांसफर होते हैं। इसलिए चोरी की गाड़ी बेचने के बाद रकम ट्रांसफर करवाने के लिए फर्जी खाते खुलवाने के लिए न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक के कर्मचारी मोहम्मद रियाज को मिलाया। प्रिंटिंग शॉप चलाने वाले शाहीन बाग के अल्ताफ और साहिल से फर्जी दस्तावेज बनवाए। शहजाद चोरी की गाड़ियों को इधर-उधर शिफ्ट करने का काम करता था। किशन भी कारों की खरीद-फरोख्त में मदद करता था। कारदेखो कंपनी का पूर्व कर्मचारी विकास मिश्रा कार कंपनियों के बीच बिचौलिए का काम करता था।
गिरोह का सरगना पुरु सिंह है। पूछताछ में उसने बताया कि मोहसिन और नौशाद मेरठ के पवन उर्फ अंधा से फर्जी नंबर प्लेट और दस्तावेज के साथ गाड़ी लेते थे। कुंदन गिरी कार्स24 कंपनी के साथ लाइजनिंग का काम करता था, जो पहले इसी कंपनी में काम करता था। इससे फोन और 14 सिम कार्ड मिले हैं, जिनका इस्तेमाल यह गाड़ी के इंस्पेक्शन की बुकिंग के लिए करता था। जांच में पता चला कि दो साल में यह इन नंबरों के जरिए 170 गाड़ियों का इंस्पेक्शन करवा चुका है। जयंत कुमार कार्स24 के इग्जेक्यूटिव को कार दिखाता था। इसी तरह ब्रजेश गिरी भी कार्स24 का पूर्व कर्मचारी है, जो गिरोह में शामिल था। पुलिस को अब पवन उर्फ अंधा, दानिश और शादाब की तलाश है।

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