गोकुलपुरी थाना पुलिस ने गंभीर अपराधों को 100 प्रतिशत सॉल्व करने में हासिल की सफलता

इस साल गोकुलपुरी थाने में कुल 22 संगीन जुर्म दर्ज हुए, जिनमें से सभी को सुलझा लिया गयाtation has achieved 100% success in solving serious crimes

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली ब्यूरो। गोकुलपुरी थाना पुलिस ने गंभीर अपराध को 100 फीसदी सॉल्व करने में सफलता हासिल की है। रोडरेज में महिला की गोली मारकर हत्या और पेट्रोल पंप लूट की कोशिश में फायरिंग के केस काफी चर्चित रहे थे। पुलिस के लिए सबसे बड़ी टेंशन एरिया में रोजाना होने वाली चोरियां हैं। इनकी वजह से थाने का क्राइम ग्राफ चढ़ता दिखता है। चोरी के मामलों को सुलझाने का पर्सेंटेज भी कम है। गाड़ी चोरी के मामलों में पूरी दिल्ली की तरह यहां भी इजाफा हुआ है।
गोकुलपुरी थाने में इस साल कुल 22 संगीन जुर्म हुए, जो सॉल्व कर लिया गया। इस साल जनवरी से 10 नवंबर तक के क्राइम डेटा पर नजर डालें तो दो मर्डर, छह जानलेवा हमले, सात लूट और सात रेप के केस दर्ज हुए। पिछले साल भी इतने ही केस थे, जिनमें से एक दंगे का मामला सुलझा नहीं है। इसलिए वर्कआउट पर्सेंटेज 95.45 रह गया था। झपटमारी पूरी दिल्ली की सबसे बड़ी दिक्कत है, लेकिन गोकुलपुरी में इस साल 21 केस दर्ज हुए हैं और 16 सुलझा लिए गए। पिछले साल झपटमारी के 15 मामलों में 12 सॉल्व कर लिए गए थे।
गाजियाबाद से लगते इस थाना एरिया में चोरी के सबसे ज्यादा 735 मामले दर्ज हैं। सेंधमारी के 28, घरों में चोरी के 87, सामान चोरी के 460 और गाड़ी चोरी के 160 मुकदमे हुए हैं। अगर वर्कआउट की बात करें तो इसका पर्सेंटेज काफी कम है। इस साल सेंधमारी के 5, घर में चोरी के 4, सामान चोरी के 13 और गाड़ी चोरी के महज 17 केस सुलझाए जा सके हैं। पिछले साल चोरी के 912 केस दर्ज थे, जिनमें सेंधमारी के 10, घरों में चोरी के 73, सामान चोरी के 721 और गाड़ी चोरी के 103 मामले थे। पुलिस ने कुल 116 केस सॉल्व किए थे।
डीसीपी राकेश पावरिया और एसीपी दीपक चंद्र गुणवंत की देखरेख में एसएचओ प्रवीण कुमार के साथ इंस्पेक्टर उमेद सिंह और संदीप कुमार स्ट्रीट क्राइम से निपटने के लिए समय-समय पर खास रणनीति बनाते हैं। यूपी के एंट्री पॉइंट जौहरीपुर एक्सटेंशन स्थित टोल पर एक परमानेंट पिकेट रहती है। भीम राव आंबेडकर कॉलेज और लोनी बॉर्डर पर टेंपरेरी पिकेट लगाई जाती है। स्ट्रैटिजी के तहत बीच-बीच में अलग-अलग इलाकों में टेंपरेरी पिकेटिंग की जाती है। रात के वक्त एक जिप्सी और तीन बाइक से हथियारबंद पुलिसकर्मी पट्रोलिंग करते हैं। हर बाइक पर दो पुलिसकर्मी होते हैं, जो अलग-अलग एरिया में घूम कर निगरानी करते हैं।
गोकुलपुरी इलाके में रहने वाले आदतन अपराधियों पर बीट स्टाफ लगातार निगरानी रखता है। वह कौन सा फोन नंबर या किस नंबर की गाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे भी नोट किया जाता है। लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। लगातार क्राइम करने वाले अपराधियों को घोषित बदमाश बनाया जा रहा है। इसी तरह फायरिंग करने के मामलों में शामिल रहे बदमाशों पर खास निगरानी रखी जा रही है। जेल से जमानत पर आने वाले आरोपियों की गतिविधियों पर भी पैनी निगाह रखी जाती है। वह किससे मिल रहे हैं और किनके साथ घूम रहे हैं, उन सबका लेखा-जोखा तैयार किया जाता है।

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