गाजियाबाद में किडनी के बढ़ रहे मरीज, हर महीने 400 से ज्यादा लोगों को पड़ती है डायलिसिस की जरूरत

गाजियाबाद। बदली लाइफ स्टाइल और लापरवाही के चलते जिले में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। संजय नगर स्थित कंबाइंड अस्पताल में 20 मशीनों के जरिए मरीजों की डायलिसिस की जा रही है, इसके बावजूद 100 से ज्यादा मरीज वेटिंग में हैं। वहीं, एनसीआर में किडनी ट्रांसप्लांट के मामले भी बढ़ रहे हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि किडनी डोनेट करने वालों में 59 प्रतिशत महिलाएं हैं। अपने जिले में ही हर महीने औसतन 3 से 4 किडनी ट्रांसप्लांट होते हैं। गौतमबुद्ध नगर में तो यह संख्या 8 से 10 है।
किडनी की बीमारियां होने का प्रमुख कारण शुगर, बीपी के अलावा बिना डॉक्टर की सलाह लिए पेन किलर का प्रयोग करना और किडनी स्टोन होना प्रमुख हैं। इन परेशानियों में लापरवाही बरतने पर किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। जेपी अस्पताल के सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विजय कुमार सिन्हा बताते हैं कि हाई बीपी और लो शुगर किडनी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। उनके अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले 8 साल के दौरान अस्पताल में 6 साल से 75 साल तक के मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट किया जा चुका है।
डॉ. सिन्हा बताते हैं कि किडनी की देखभाल जरूरी है। लाइफ स्टाइल बदलने के कारण 14 वर्ष की आयु में भी शुगर और बीपी के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन अभिभावक बच्चा मानकर उनकी इस बीमारी को नजरअंदाज करते हैं, जिसकी सीधा असर किडनी पर पड़ता है। यदि समय से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जाए तो किडनी डिजीज से काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के 59 प्रतिशत मामलों में डोनर महिलाएं होती हैं।
पुरुष ज्यादा होते हैं पीड़ित
सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमित के देवड़ा बताते हैं कि आमतौर पर महिलाएं शुगर और बीपी को नजर अंदाज करती हैं, इसके बावजूद पुरुषों में किडनी डिजीज के मामले ज्यादा होते हैं। आंकड़ों के अनुसार पुरुषों में 55 प्रतिशत और महिलाओं में 45 प्रतिशत किडनी डिजीज के मामले होते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि महिलाओं में अल्कोहल, सिगरेट और तंबाकू के सेवन की लत कम देखने को मिलती है। डॉ. देवड़ा बताते हैं कि आमतौर पर किडनी डिजीज के लक्षण उस समय सामने आते हैं जब किडनी 30 से 40 प्रतिशत तक डैमेज हो चुकी होती है। इस पर भी यदि सही उपचार अपनाया जाए तो किडनी को पूरी तरह से डैमेज होने से रोका जा सकता है।
डायलिसिस में लंबी वेटिंग
गाजियाबाद में हर महीने लगभग 400 लोगों को किडनी डिजीज के कारण डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। जिले में सरकारी स्तर पर संजय नगर स्थित कंबाइंड अस्पताल में निशुल्क डायलिसिस सेवा उपलब्ध है। डायलिसिस सेंटर में 20 मशीनों के जरिए रोजाना 60 मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। इसके बावजूद 100 से ज्यादा मरीज वेटिंग में हैं। डायलिसिस केंद्र में 60 प्रतिशत 20 से 40 उम्र के रोगी इलाज करा रहे हैं। जबकि 40 प्रतिशत मरीज 22 से 32 आयु वर्ग के है। अधिकांश मरीजों की दोनों किडनियां महज 2 से 4 प्रतिशत ही काम कर पा रही हैं। कुछ मरीजों की किडनियां पूरी तरह से डैमेज हो चुकी हैं और उन्हें हर दूसरे दिन डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। बीते पांच साल में हजारों मरीजों की डायलिसिस की जा चुकी है। इसमें युवाओं की संख्या ज्यादा है।




