भारतीय वायु सेना को 4.5 पीढ़ी के एडवांस लड़ाकू विमानों की जरूरत : भारतीय वायुसेना के प्रमुख वी आर चौधरी

जोधपुर, (राजस्थान)। भारतीय वायुसेना के प्रमुख वी आर चौधरी ने देश के लिए पांचवी जनरेशन के एयरक्राफ्ट की पांच से छह स्वाइड्रन की आवश्कयता बताई है। उन्होंने कहा कि हमने हमारी जरूरत से अवगत करवाया है। हमारा RFI इश्यू हो गया है और आगे की कोशिश जारी है। भारतीय वायु सेना की युद्ध क्षमता को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए आधुनिक विमानों को शामिल करने पर जोर देते हुए, वायुसेना प्रमुख ने कहा कि बल को 4.5 पीढ़ी के पांच से छह स्क्वाड्रन की आवश्यकता है।

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि भारत की वायु शक्ति भविष्य में किसी युद्ध का परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण और अत्यावश्यक भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि भविष्य में दुनिया में कहीं भी किसी भी संघर्ष में, वायु शक्ति संघर्ष के परिणामों को तय करने में बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक भूमिका निभाएगी। इस तरह के अभ्यास (गरुड़) हमें अपने कौशल को सुधारने का मौका देते हैं।’

वायु सेना प्रमुख गरुड़ यद्धाभ्यास के महत्व को बताते हुए कहा कि यह भारतीय और फ्रांसीसी वायु सेना के बीच अंतर को बेहतर बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, ‘हमने सीखा है कि अपनी पारस्परिकता को कैसे आगे बढ़ाया जाए। फ्रांसीसी वायु सेना भी राफेल उड़ाती है, हम भी राफेल उड़ाते हैं, लेकिन हम राफेल के साथ-साथ कई अन्य विमान भी उड़ाते हैं। यह सीखना महत्वपूर्ण है कि मैत्रीपूर्ण राष्ट्रों के साथ आपसी संचालन कैसे किया जाता है। बता दें कि राफेल एक फ्रांसीसी डबल इंजन और मल्टी रोल फाइटर विमान है, जिसे दसाल्ट एविएशन ने डिजाइन और तैयार किया है।

एयर चीफ मार्शल ने बताया, ‘गरुड़ एक अभ्यास है, जिससे यह मौका मिला है। इसके जरिए हमारे पायलटों को व क्रू मेंबर्स एक-दूसरे के बेस्ट पैकेज से अवगत होंगे।’ मालूम हो कि भारतीय वायु सेना और फ्रांसीसी वायु व अंतरिक्ष बल द्विपक्षीय अभ्यास ‘Garuda VIl’ में हिस्सा ले रहे हैं। फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल के प्रमुख जनरल स्टीफन मिले ने कहा कि हम यहां भारतीय वायु सैनिकों के साथ उड़ान भरने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास से हम एक दूसरे को समझने में सक्षम होंगे। बता दें कि 26 अक्टूबर को शुरू हुए युद्धाभ्यास भारत और फ्रांस दोनों देशों की एयरफोर्स के बीच 12 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान दोनों देश की एयरफोर्स अपने-अपने अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। यह दोनों देशों की वायुसेना का सातवां संयुक्त युद्धाभ्यास है।

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