जबलपुर के छात्रों ने 3000 रुपये में बनाया सर्विलेंस ड्रोन, कलेक्टर ने की सराहना

न बड़ी लैब, न लाखों का फंड... फिर भी जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने वो कर दिखाया जिसे देखकर कलेक्टर भी दंग रह गए। होनहार छात्रों ने महज 3 हजार रुपए की लागत से 50 ग्राम का ऐसा सर्विलेंस ड्रोन तैयार किया है, जो सुरक्षा के लिहाज से गेम चेंजर साबित हो सकता है।

जबलपुर/मध्य प्रदेश। सीमित संसाधनों और अलग सोच के साथ जब जुनून जुड़ जाए तो बड़े नवाचार संभव हो जाते हैं। इसका उदाहरण जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (जेईसी) के छात्रों ने पेश किया है। छात्रों की एक टीम ने महज तीन हजार रुपये की लागत से एक कॉम्पैक्ट सर्विलेंस ड्रोन तैयार किया है, जिसे ‘निगरानी का नन्हा योद्धा’ कहा जा रहा है।
इस ड्रोन की सबसे बड़ी विशेषता इसका छोटा और हल्का आकार है। इसका वजन केवल 40 से 50 ग्राम के बीच है, लेकिन इसके बावजूद यह 720 पिक्सल कैमरा क्वालिटी को सपोर्ट करता है। छोटा आकार होने के कारण यह संकरे और संवेदनशील क्षेत्रों में भी आसानी से निगरानी करने में सक्षम है, जहां बड़े ड्रोन आसानी से नजर में आ जाते हैं।
छात्रों ने ड्रोन के निर्माण में माइक्रो कंट्रोलर्स, मोटर्स और वाई-फाई मॉड्यूल का उपयोग किया है। इसके साथ ही इसकी पूरी कोडिंग स्वयं तैयार की गई है। खास बात यह है कि ड्रोन के प्रोपेलर्स भी 3डी प्रिंटर की मदद से छात्रों ने खुद डिजाइन किए हैं, जिससे यह प्रोजेक्ट और भी विशेष बन गया है।
प्रोजेक्ट लीड गुरशान सिंह भामरा ने बताया कि उनकी टीम ने ट्रिपल आईटीडीएम (IIITDM) की ड्रोन सॉकर लीग प्रतियोगिता में भाग लिया था, जहां से उन्हें इस तकनीक को सर्विलेंस के लिए उपयोग करने का विचार मिला। उन्होंने बताया कि फिलहाल ड्रोन का फ्लाइट टाइम सीमित है, जिसे बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
छात्रों की इस उपलब्धि से प्रभावित होकर जबलपुर के जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने टीम से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे और बेहतर बनाने तथा व्यावहारिक उपयोग के लिए तैयार करने में हर संभव प्रशासनिक और आर्थिक सहयोग देने का आश्वासन दिया।
इस प्रोजेक्ट को जेईसी की विभिन्न शाखाओं के छात्रों ने मिलकर तैयार किया है। टीम में प्रोजेक्ट लीड गुरशान सिंह भामरा के साथ मैकेनिकल इंजीनियरिंग की संस्कृति चौकसे और खुशी केवट, इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग के अविनी जैन और प्रांजल कुशवाहा तथा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अंश उराव शामिल हैं। यह नवाचार न केवल छात्रों की तकनीकी दक्षता को दर्शाता है, बल्कि सीमित संसाधनों में भी बड़े समाधान खोजने की उनकी क्षमता का प्रमाण है।

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