फतेहपुर में “नीम के पेड़ों पर चली मौत की आरा मशीन”,, वन माफियाओं के हौसले बुलंद”
दो दर्जन से अधिक नीम के प्रतिबंधित पेड़ किए धराशाई

सत्येंद्र शुक्ला,(फतेहपुर/उतर प्रदेश)। फतेहपुर जिले के खखरेरू थाना क्षेत्र के अंतर्गत गोरिया चौकी से लगभग एक किलोमीटर पहले का इलाका रविवार को अपराध का अड्डा बन गया। यहां पर हरियाली का प्रतीक माने जाने वाले प्रतिबंधित नीम के दो दर्जन से अधिक पेड़ ठेकेदार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से धराशाई कर दिए गए। नीम के पेड़, जिन्हें पर्यावरण और औषधीय महत्व के कारण संरक्षित माना जाता है, खुलेआम काटे गए। ग्रामीणों के अनुसार मशीनों की आवाज़ दूर तक सुनाई दे रही थी, लेकिन प्रशासनिक अमला मौके पर नहीं पहुंचा।ठेकेदार और उसके लोग बिना किसी डर के खुलेआम हरियाली को नष्ट करते रहे। यह घटना केवल पर्यावरणीय अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है, जो प्रशासनिक उदासीनता का फायदा उठाकर हरियाली को नष्ट कर रहा है।
सरकार हर वर्ष ग्राम सभाओं में वृक्षारोपण और उनकी देखभाल का दावा करती है। लेकिन इस घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय पुलिस और वन विभाग ने केवल औपचारिकता निभाई और कड़ी कार्रवाई से किनारा कर लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वन माफियाओं और ठेकेदारों की मिलीभगत से यह घटना संभव हुई। प्रशासनिक उदासीनता ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। यह मामला केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि प्रकृति और कानून दोनों के खिलाफ संगठित अपराध है। प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना मिलती है, लेकिन कार्रवाई केवल “कागज़ी मुकदमे” तक सीमित रहती है। कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को गुप्त रूप से बाहर भेजा जाता है, जहां इसे ऊँचे दामों पर बेचा जाता है।वन क्षेत्राधिकारी विवेक कुमार शुक्ला ने बताया कि “मुकदमा दर्ज कराकर दोषियों को वन माफिया घोषित किया जाएगा।”हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि यह केवल औपचारिक बयान है और वास्तविक कार्रवाई शायद ही हो।
“सरकार हर साल पेड़ लगाने का दावा करती है, लेकिन जब नीम के पेड़ काटे गए तो कोई बचाने नहीं आया।” यह घटना बताती है कि फतेहपुर में नीम के पेड़ों की अवैध कटाई केवल स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और वन माफियाओं की ताकत का प्रतीक है। सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन इस नेटवर्क को तोड़ पाएंगे, या फिर हर साल लगाए जाने वाले पौधे इसी तरह मशीनों की भेंट चढ़ते रहेंगे।




