डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 21 दिन की पैरोल, 17वीं बार जेल से आया बाहर
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की पैरोल मिली है। जेल में बंद डेरा प्रमुख रोहतक की सुनारिया जेल से निकलकर सिरसा जाएगा। 2020 में पैरोल/फरलो पर पहली बार जेल से रिहा होने के बाद से राम रहीम को यह 17वीं बार पैरोल मिली है।

रोहतक/हरियाणा। हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 21 दिन की पैरोल मंजूर हुई है। दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहा राम रहीम पैरोल अवधि के दौरान सिरसा जाने वाला है। यह 17वीं बार है, जब वह जेल से बाहर आया।
इससे पहले 26 मई को राम रहीम को 30 दिन की पैरोल मिली थी। इसी वर्ष जनवरी में भी उसे 40 दिन की पैरोल दी गई थी, जिसके बाद वह 15 फरवरी को वापस सुनारिया जेल पहुंचा था। इससे पहले 15 सितंबर 2025 को भी उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी।
राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। विपक्षी दलों ने कई बार पैरोल की प्रक्रिया और समय को लेकर आपत्ति जताई है। वहीं प्रशासन का कहना है कि पैरोल संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दी जाती है।
गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत ने 10-10 वर्ष की सजा सुनाई थी। वह दोनों मामलों में कुल 20 वर्ष की सजा काट रहा है। पिछली कई पैरोल के दौरान राम रहीम उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहा था।
सिरसा मुख्यालय वाले डेरा सच्चा सौदा के हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। राम रहीम की पैरोल के दौरान उसके अनुयायियों और संगठन से जुड़ी गतिविधियों को लेकर भी प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है।
उधर, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर भी मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने राम रहीम और केंद्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा है कि मामले की सुनवाई 16 नवंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
उच्चतम न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर नहीं की है। उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है और इस संबंध में 10 अगस्त को नोटिस जारी किया गया था।




