बांके बिहारी मंदिर के दान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- एक-एक पाई भगवान के खजाने में हो जमा
बांके बिहारी के दान मामले पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश आया है। कोर्ट ने दान राशि का पूरा पैसा दानपेटी या बैंक खातों में जमा कराए जाने के आदेश दिए हैं।

मथुरा/उत्तर प्रदेश। वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया दान सबसे पहले मंदिर के कोष में जमा होना चाहिए। दानपेटियों अथवा मंदिर के आधिकारिक ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त होने वाली राशि सीधे मंदिर के खाते में जमा कराने की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि मंदिर से जुड़ा कोई भी व्यक्ति मंदिर के कोष में राशि जमा होने से पहले उस पर अपना अधिकार नहीं जता सकता। न्यायालय ने चेतावनी दी कि दान की राशि मंदिर के खजाने में पहुंचने की प्रक्रिया में सेवायतों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बाधा डालने के प्रयास को गंभीरता से लिया जाएगा।
मामले की सुनवाई के दौरान मंदिर की उच्चस्तरीय प्रबंधन समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कुछ तस्वीरें और वीडियो न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। इनमें कथित तौर पर दानपेटी के सामने कुछ लोगों के खड़े होकर श्रद्धालुओं से पॉलिथीन बैग में चढ़ावा लेने की स्थिति दिखाई गई। आरोप लगाया गया कि श्रद्धालुओं को दानपेटी में राशि डालने के बजाय पॉलिथीन बैग में चढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
प्रबंधन समिति की स्थिति रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ भंडारी श्रद्धालुओं द्वारा दिए जा रहे दान को बीच में रोक रहे थे। कुछ दानपेटियों के मुंह फूलों, प्लेटों अथवा अन्य वस्तुओं से ढके होने तथा ऑनलाइन दान के लिए लगाए गए क्यूआर कोड को क्षतिग्रस्त या ढकने के आरोप भी रिपोर्ट में लगाए गए।
हालांकि, देवता के प्रतिनिधि का दावा करने वाले पक्षकार ने प्रबंधन समिति के आरोपों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नकद राशि ‘भोग’ के लिए एकत्र की जाती है और इस संबंध में सिविल कोर्ट का आदेश सेवायतों के उपभोग के अधिकार को मान्यता देता है।
इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि न्यायालय सेवायतों के उनके हिस्से के अधिकार पर विवाद नहीं कर रहा है, लेकिन दान की राशि पहले देवता को समर्पित होनी चाहिए। इसके बाद ही निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सेवायतों को उनका हिस्सा मिल सकता है। न्यायालय ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु देवता को दान करता है और किसी भंडारी अथवा पुजारी को मंदिर के कोष में राशि जमा होने से पहले उस पर अपना अधिकार जताने का अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति को दान के संबंध में पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है, ताकि श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले धन को लेकर किसी प्रकार का संदेह न रहे। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि मंदिर की दान राशि से किसी प्रकार की संपत्ति खरीदने से पहले न्यायालय की अनुमति ली जाए।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से बांके बिहारी मंदिर में दान व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




