जीडीए के अधिकारियों की मिलीभगत से गाजियाबाद में भूमाफियाओं के हौसले बुलंद
पीड़ित पर दर्ज कराई झूठी एफआईआर, पीड़ित ने सीएम योगी से लगाई मदद की गुहार

गाजियाबाद/उत्तर प्रदेश। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के कुछ अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में सामने आए मामलों में यह स्पष्ट हुआ है कि भूमाफियाओं ने जीडीए के अधिकारियों की मिलीभगत से न सिर्फ सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया, बल्कि विरोध करने वाले पीड़ितों पर झूठी एफआईआर भी दर्ज करवा दी गई। यह घटना न केवल प्राधिकरण की संपत्ति के गलत इस्तेमाल का एक उदाहरण है, बल्कि पीड़ित को फर्जी मुकदमों में फंसाने की कोशिशों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद से आया है। जहां बुद्ध विहार, सेक्टर-1, वैशाली के निवासी सेवा संयोजक एस.पी. भारद्वाज भू माफियाओं द्वारा जीडीए की कब्जा की गई भूमि को मुक्त करने का प्रयास कर रहे हैं। मगर उनका यह प्रयास भू-माफियाओं के साथ-साथ जीडीए के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को भी रास नहीं आ रहा है। जीडीए की जमीन पर कुंग भू-माफिया महेंद्र सिंह, सुमित, नवीन उर्फ सोनू, प्रवीण पाल, जगमाल पाल, सनी पाल आदि ने 10 वर्षों से कब्जा कर रखा है। इस संबंध में एस.पी. भारद्वाज के द्वारा जिलाधिकारी गाजियाबाद को शिकायत की गई थी जिस पर दो बार की कार्यवाही हो चुकी है। मगर फिर भी जीडीए के अधिकारियों की मिली-भगत के चलते इस जमीन पर भूमाफियाओं का कब्जा बरकरार है। इसके अतिरिक्त गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के जे.ई. वीरेंद्र पांडे द्वारा भूमाफिया महेंद्र सिंह के साथ मिलकर एस.पी. भारद्वाज पर ही एफआईआर दर्ज कर दी गई। इस संबंध में पीड़ित एस.पी. भारद्वाज द्वारा लिखित तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ एवं संबंधित मंत्रियों व अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई गई है। एस.पी. भारद्वाज ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक जीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक भूमाफियाओं का मनोबल बढ़ता रहेगा और आम जनता को न्याय नहीं मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार, जीडीए के कुछ अधिकारियों ने जानबूझकर इन एफआईआर को दर्ज करने में मदद की ताकि पीड़ित को डराकर चुप कराया जा सके।
यह घटना गाजियाबाद में भू-माफियाओं की बढ़ती सक्रियता को उजागर करती है। प्राधिकरण की संपत्तियों पर फर्जी सौदों और कब्जे के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं।प्रशासन की लचर निगरानी इन माफियाओं के लिए एक वरदान साबित हो रही है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और निगरानी तंत्र की कमी के चलते आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।





