भिंड में रेत माफिया के खिलाफ खबरें लिखने पर पत्रकारों की पुलिस अधिकारियों द्वारा पिटाई
भिंड में पत्रकारों की पिटाई का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जज से बोले- जान को खतरा

भिंड/मध्यप्रदेश। जिले में रेत माफिया के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने पर पुलिस द्वारा कथित पिटाई के मामले में पीड़ित पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने जान का खतरा बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने राहत के लिए पहले उच्च न्यायालय का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया, जिसके जवाब में वकीलों ने उनकी जान को खतरे की बात कही। अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई है।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि उन्होंने राहत के लिए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया? पीड़ितों के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उन्हें जान का खतरा है। वकीलों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
दरअसल, इस साल मई में मध्यप्रदेश के भिंड में कुछ पत्रकारों ने आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि अवैध रेत खनन गतिविधियों से संबंधित रिपोर्टिंग करने पर मध्य प्रदेश के कुछ पुलिस अधिकारियों ने एसपी ऑफिस के अंदर उन पर हमला किया था। न्यायमूर्ति शर्मा ने सुनवाई के दौरान एक सवाल किया। उन्होंने पूछा ‘क्या हमें देशभर के अग्रिम जमानत के मामलों पर केवल इसलिए विचार करना चाहिए क्योंकि इसमें एक पत्रकार शामिल है?’
पत्रकारों का पक्ष रखने वाले वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि दोनों को अपने जान पर खतरा मंडरा रहा है। उन पर ‘झूठे और मनगढ़ंत’ मामलों में गिरफ्तारी का खतरा है। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत गंभीर मामला है…उन्हें एक पुलिस कार्यालय में पीटा गया…वे अब शरण लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। यह वास्तव में उन मामलों में से एक है…उनके पास साधन नहीं हैं।’
पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि रेत माफिया के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने पुलिस पर एसपी ऑफिस में पिटाई करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे हाईकोर्ट जाने के बारे में पूछा, लेकिन उनके वकीलों ने जान का खतरा बताया। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा। यह मामला पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। पत्रकारों का आरोप है कि उन्हें अवैध रेत खनन गतिविधियों के बारे में रिपोर्टिंग करने के कारण प्रताड़ित किया गया। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी इस घटना की निंदा की है।




