चिलचिलाती धूप में 21 दिन से खड़े होकर तपस्या कर रहा था महंत, अचानक हो गई मृत्यु

10 जून को पूरी होनी थी तपस्या, भंडारे का आयोजन भी तय था,ट्रक ड्राइवर से साधु बनने तक की कहानी

चरखी दादरी/हरियाणा। चरखी दादरी जिले के गांव अटेला नया स्थित मंडालिया धाम में 21 दिन से खड़े होकर तपस्या कर रहे महंत मुख्तानाथ की अचानक मृत्यु हो गई। बुधवार को दादरी सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। 52 वर्षीय मुकेश कुमार उर्फ मुख्तानाथ, दादरी के नौंसवा गांव के निवासी थे। ग्रामीणों के अनुसार, वे 41 दिन की खड़ेश्री तपस्या कर रहे थे, जिसमें व्यक्ति लगातार खड़े रहकर उपवास करता है। इस दौरान वे अन्न ग्रहण नहीं करते थे, केवल गाय का दूध पीते थे।
ग्रामीणों ने बताया कि उनकी तपस्या 10 जून को पूरी होनी थी, जिसके उपलक्ष्य में मंदिर में भंडारे का आयोजन भी निर्धारित था। लेकिन तपस्या के 21वें दिन ही उनका जीवन समाप्त हो गया। जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल कुलदीप सिंह के अनुसार, मुख्तानाथ पिछले तीन-चार वर्षों से सन्यासी जीवन जी रहे थे और गांव अटेला नया में स्थित मंदिर में धार्मिक क्रियाएं और तपस्याएं कर रहे थे। मृतक के पुत्र मोनू के बयान के आधार पर पुलिस ने इस मामले को इत्तफाकिया (प्राकृतिक) मौत मानते हुए कार्रवाई की है। कोई भी आपराधिक पहलू सामने नहीं आया है।
52 वर्षीय मुख्तानाथ का असली नाम मुकेश कुमार था और वे दादरी जिले के नौंसवा गांव के निवासी थे। मुख्तानाथ कभी ट्रक चलाया करते थे। उनके जीवन में एक मोड़ उस समय आया जब पत्नी से किसी बात पर अनबन हो गई और वह बच्चों को लेकर मायके चली गई। इससे मुकेश मानसिक रूप से परेशान हो गए। घर में केवल उनकी मां ही बची थीं। पत्नी के जाने के बाद उन्होंने घर छोड़ दिया और कोई नहीं जान पाया कि मुकेश कहां गए। पत्नी के लौटने के बाद भी वह नहीं मिले। बाद में पता चला कि मुकेश अब ‘मुख्तानाथ’ बन चुके हैं और भक्ति में लीन होकर तपस्वी जीवन अपना चुके हैं।

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