जेल नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को मिली मंजूरी, दिल्ली के इन कैदियों की हो पाएगी जल्दी रिहाई

नई दिल्ली। जेलों में सुधार की महत्वपू्र्ण पहल के तहत दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली जेल नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद अब इस संबंध में जारी होने वाली अधिसूचना के मसौदे को भी मंजूरी दे दी है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही अशक्त कैदियों की समय से पहले रिहाई का रास्ता साफ हो सकेगा। इस संशोधन का सबसे ज्यादा लाभ 70 साल से अधिक उम्र वाले उन बुजुर्ग और अशक्त कैदियों को मिलेगा, जो कम से कम अपनी आधी सजा पूरी कर चुके हैं। हालांकि, यह उन दोषियों पर लागू नहीं होगा, जिन्हें उम्र कैद या मृत्यु दंड की सजा मिली है या जिन्हें देशद्रोह, आतंकवाद, एनडीपीएस एक्ट, पोक्सो एक्ट, यूएपीए, एंटी करप्शन एक्ट या मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट से जुड़े आरोपों के तहत दोषी ठहराया गया है।
कैदियों को मिल सकेगी समय से पहले रिहाई
एलजी ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार, एलजी ने ‘दिल्ली जेल नियम 2018’ में संशोधन के लिए अधिसूचना के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इससे दिल्ली की जेलों में तय अवधि की कैद की सजा काट रहे अक्षम कैदियों की समय से पहले रिहाई का रास्ता साफ हो सकेगा। यह संशोधन दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा एक रिट पिटिशन पर सुनवाई के दौरान दिए गए आदेश के अनुपालन में किया जा रहा है। इस याचिका में जेल सुधार पर अखिल भारतीय समिति (1982-85 मुल्ला समिति) और मॉडल जेल नियम, 2003 की रिपोर्ट के संदर्भ में अशक्त कैदियों की समय से पहले रिहाई की मांग की गई थी।
जेल से कैदियों की भीड़ होगी कम
एलजी ऑफिस के अधिकारियों के मुताबिक, इस संशोधन का उद्देश्य ऐसे बुजुर्ग/अशक्त कैदियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के साथ दिल्ली की तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेल में कैदियों की भीड़ को कम करने का भी है, जहां 10,026 की कुल क्षमता के मुकाबले 20 हजार से ज्यादा कैदी कैद हैं। इस संशोधन के तहत नियम 1246-ए को दिल्ली जेल नियम-2018 में शामिल किया गया है। जेल विभाग द्वारा इस संबंध में भेजे गए प्रस्ताव पर दिल्ली सरकार के होम और लॉ डिपार्टमेंट ने भी सहमति जताई थी। उसी के बाद होम डिपार्टमेंट के द्वारा ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को मंजूरी के लिए एलजी के पास भेजा गया था, जिसे अब एलजी ने भी मंजूरी दे दी है।
5 सदस्यों की समिति होगी गठित
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली जेल नियम 2018 के नियम 1251 के अनुसार सेंटेंस रिव्यू बोर्ड केवल आजीवन कारावास की सजा काट रहे उन कैदियों की सजा कम करने पर विचार करता था, जिन्होंने अपनी वास्तविक सजा के 14 साल पूरे कर लिए हैं। मगर अब नियमों में संशोधन के साथ ऐसे अशक्त दोषी, जिनकी उम्र 70 साल या इससे ज्यादा है ओर जो अपने रोजमर्रा के काम करने में असमर्थ हैं, उन्हें इसके लिए खासतौर से गठित समीक्षा समिति की सिफारिशों पर समय से पहले रिहा किया जा सकता है। इन कैदियों में वे कैदी भी शामिल हैं, जो एक निश्चित अवधि के लिए कठोर या साधारण कारावास की सजा काट रहे हैं और सजा के खिलाफ उनकी अपील पर फैसला कोर्ट द्वारा किया जा चुका है और जिन्हें मेडिकल बोर्ड द्वारा अशक्त घोषित किया गया है। इसके लिए 5 सदस्यों की एक मूल्यांकन समिति भी गठित की जाएगी।




