सुल्‍तानपुर में डॉक्‍टर की हत्‍या के आरोपी बीजेपी नेता और भाई के ऑफिस पर चला बुलडोजर

सुल्‍तानपुर/उत्तर प्रदेश। सुल्‍तानपुर में शनिवार रात हुए डॉ घनश्याम तिवारी मर्डर के आरोपी भाजयुमो जिलाध्‍यक्ष अजय नारायण सिंह के कार्यालय पर आज जिला प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। प्रशासन का कहना है कि अवैध भूखंड पर बना था। शेष ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अभी आगे भी की जानी है। पुलिस के आला अधिकारियों ने मुख्य आरोपी अजय नारायण पर 50 हजार का इनाम घोषित किया है। डीएम ने बताया कि आरोपी और उनके परिवार ने अवैध कब्जा को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अब तक 4 करोड़ की जमीन मुक्त कराई गई है।
डॉ. घनश्याम तिवारी की पत्नी निशा तिवारी ने एसपी को एक शिकायती पत्र दिया है। उनका आरोप है कि घटना से आहत होकर वे विक्षिप्त हो गई थी। पुलिस ने सादे पेपर पर साइन लेकर स्वतः केस दर्ज कर लिया। निशा तिवारी ने आज दी तहरीर में मुख्य आरोपी अजय नारायण सिंह पुत्र जगदीश नारायण सिंह के साथ-साथ उसके पिता, भाजयुमो जिलाध्यक्ष चंदन नारायण सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य रह चुके गिरीश नारायण सिंह उर्फ बब्बन सिंह, विजय नारायण सिंह और अज्ञात लोगों का उल्लेख किया है। पत्नी का आरोप है कि उनके पति का अपहरण करके पैर को ड्रिल मशीन से छेदकर और पीट-पीटकर हत्या की गई है।
आरोप है कि शनिवार देर शाम शहर के शास्त्री नगर इलाके में गिरीश नारायण सिंह के भतीजे अजय नारायण सिंह ने रंगदारी न देने पर डॉक्‍टर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। डॉक्टर की पत्नी निशा तिवारी की तहरीर पर अजय व दो अज्ञात के विरुद्ध कोतवाली नगर में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। तीन लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया लेकिन मुख्य आरोपी अजय नारायण पुलिस को ढूंढे नहीं मिला।
उधर रविवार शाम पोस्टमॉर्टम के बाद शव पैतृक गांव पहुंचा तो परिवार वालों ने शव के अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। आज सुबह जाकर परिवार ने प्रशासन के सामने 6 मांगें रखीं। परिवार को सुरक्षा और शस्त्र लाइसेंस दिया जाए। जमीन पर हमें तत्काल कब्जा दिलाया जाए। योग्यता के अनुसार रोजगार और एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए। अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी और आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई की जाए। इन मांगों की संस्तुति भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. आरए वर्मा, लंभुआ से भाजपा विधायक सीताराम वर्मा, सदर विधायक राजबाबू उपाध्याय और पूर्व लंभुआ विधायक देवमणि द्विवेदी ने की। जिस पर डीएम जसजीत कौर ने सहमति व्यक्त की तब कहीं जाकर अंतिम संस्कार हो सका। स्वयं पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी ने डॉ. के शव को कांधा दिया। बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

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