बड़ी खबर: एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर से फर्जी आदेश जारी करने के मामले में पेशकार गिरफ्तार

सचिन पांडेय/जिला ब्यूरो चीफ
कौशाम्बी/उत्तर प्रदेश। मंझनपुर तहसील में एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर आदेश जारी किए जाने के मामले में तहसील के पेशकार कमलेश कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। करीब तीन माह पुराने इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच अपर जिलाधिकारी शालिनी प्रभाकर को सौंपी गई है।
बताया जा रहा है कि पश्चिमशरीरा क्षेत्र से संबंधित अंसार बनाम राज्य सरकार प्रकरण में तलबी और भूमिधरी जमीन से जुड़े एक आदेश पर एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया था। आदेश जारी होने के बाद जब इसकी जानकारी तहसील प्रशासन के अधिकारियों को हुई तो मामले को गंभीरता से लिया गया। एसडीएम राजकुमार मौर्य ने प्रकरण में कार्रवाई कराते हुए पुलिस को आवश्यक निर्देश दिए, जिसके बाद पुलिस ने पेशकार कमलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
मामला सामने आने के बाद तहसील में डिजिटल हस्ताक्षर के इस्तेमाल की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जांच अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल किस परिस्थिति में किया गया और आदेश जारी करने की पूरी प्रक्रिया क्या रही। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आदेश तैयार करने से लेकर उसे जारी करने तक किन-किन स्तरों पर कार्रवाई हुई थी।
अपर जिलाधिकारी शालिनी प्रभाकर के नेतृत्व में जांच में मामले से जुड़े दस्तावेजों और आदेश की प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है। जांच टीम यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि डिजिटल हस्ताक्षर तक पहुंच किसके पास थी और उसका इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुआ था या नहीं। आदेश जारी किए जाने से संबंधित अभिलेखों और अन्य तथ्यों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
प्रशासनिक स्तर पर मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल अधिकारियों के नाम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से आदेश जारी करने के लिए किया जाता है। ऐसे में इसके इस्तेमाल की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारी तय करना महत्वपूर्ण होगा।
पुलिस द्वारा पेशकार की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुआ। साथ ही प्रकरण में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन और पुलिस की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।




