बांग्लादेश में दो साल बाद पांच घंटे के लिए जेल से बाहर आए चिन्मय कृष्ण, मां के अंतिम संस्कार के लिए मिली पेरोल
बांग्लादेश में हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो साल बाद अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल मिली।

ढाका/एजेंसी। बांग्लादेश में हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास दो साल बाद केवल पांच घंटे के लिए जेल से बाहर आए। चिन्मय को उनकी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गुरुवार को केवल पांच घंटे की पैरोल मिली। नवंबर 2024 में राजद्रोह और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप में चिन्मय को गिरफ्तार किया गया था।
‘द डेली स्टार’ अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, चट्टोग्राम जिले के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम मिया ने गुरुवार दोपहर चिन्मय के भाई की अर्जी के बाद उन्हें पांच घंटे के लिए पैरोल पर जेल से रिहा करने का आदेश जारी किया। चिन्मय की मां संध्या रानी धर का हथाजारी के अस्पताल में इलाज चल रहा था और गुरुवार सुबह उनका निधन हो गया।
दो साल पहले गिरफ्तार किए जाने के बाद चिन्मय पर हत्या, हत्या की कोशिश और तोड़-फोड़ जैसे कई मामले भी दर्ज किए गए थे। उन पर कुल छह आपराधिक मामले चल रहे हैं। उन्हें अब तक चार मामलों में हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। हालांकि राजद्रोह के मामले में उनकी जमानत पर रोक है, जबकि हत्या के मामले की सुनवाई चट्टोग्राम स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में चल रही है।
हत्या का यह मामला एक सरकारी वकील की हत्या से संबंधित है। चट्टोग्राम में चिन्मय की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं ने सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या कर दी थी।
चिन्मय पहले इस्कॉन से जुड़े थे। वह हिंदू सम्मिलित सनातन जागरण जोट नाम के संगठन के प्रवक्ता हैं। छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद इस संगठन ने 2024 में बांग्लादेश में कई रैलियां आयोजित कीं। इन रैलियों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा की मांग की गई।




