गरीब बुजुर्ग का मकान बारिश में ढहा, नाली-खड़ंजे की शिकायत भी कागजों में निस्तारित; जमीन पर नहीं हुआ काम
मिर्जापुर के सिटी क्षेत्र के बसुही देवरी गांव में भारी बारिश से करीब 65 वर्षीय भगन्तु वर्मा का मकान ढह गया। वह और उनकी पत्नी बाल-बाल बच गए। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में जलनिकासी और खराब रास्ते की समस्या लंबे समय से बनी है। शिकायत पोर्टल पर 22 अक्टूबर 2025 को नाली-खड़ंजे से संबंधित प्रकरण दर्ज हुआ था, जिसे ‘निस्तारित’ दिखाया गया, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार मौके पर काम नहीं हुआ।

मिर्जापुर/उत्तर प्रदेश। बीती रात हुई भारी बारिश के दौरान मिर्जापुर के विकासखंड सिटी क्षेत्र के बसुही देवरी गांव में करीब 65 वर्षीय भगन्तु वर्मा का मकान पूरी तरह ढह गया। मकान गिरने के समय भगन्तु वर्मा और उनकी पत्नी घर में मौजूद थे, लेकिन दोनों बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद परिवार के सामने सुरक्षित आश्रय की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से आवास, सड़क और नाली की समस्या को लेकर शिकायतें किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
भगन्तु वर्मा बेहद गरीब परिवार से हैं और उम्र के इस पड़ाव पर भी रिक्शा चलाकर अपनी तथा पत्नी की आजीविका चला रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार उनके घर के सामने उचित सड़क और नाली की व्यवस्था नहीं है। आसपास के घरों और रास्ते का पानी उनके दरवाजे की ओर बहता है, जिससे बरसात के दिनों में जलभराव और कीचड़ की स्थिति पैदा हो जाती है। खराब रास्ते के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मामले की गंभीरता इस बात से भी सामने आती है कि नाली और खड़ंजे के निर्माण को लेकर शासन के शिकायत पोर्टल पर भी प्रकरण दर्ज कराया गया था। उपलब्ध शिकायत विवरण के अनुसार नीरज कुमार तिवारी की ओर से 22 अक्टूबर 2025 को शिकायत संख्या 40019925030595 दर्ज कराई गई थी। शिकायत में विश्वकर्मा बस्ती से गोसाई बस्ती तक नाली और खड़ंजा निर्माण से संबंधित समस्या उठाई गई थी। शिकायत की स्थिति में इसे ‘निस्तारित’ दर्शाया गया है, जबकि शिकायतकर्ता और ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर वास्तविक काम नहीं हुआ और समस्या आज भी बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया कागजों तक सीमित रह गई। यदि नाली और रास्ते की समस्या का समाधान वास्तव में हो गया होता तो बारिश के दौरान जलनिकासी की स्थिति इतनी खराब नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत पोर्टल पर प्रकरण निस्तारित दिखाए जाने के बावजूद मौके पर नाली और खड़ंजे की समस्या बनी हुई है और लोगों को उसी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है।
मामले को लेकर सर्व हितकारी प्रेस क्लब भारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं अधिवक्ता नीरज कुमार तिवारी की ओर से ग्राम स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र दिए जाने का दावा किया गया है। उनके अनुसार, खंड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष समस्या उठाई गई। मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर भी प्रकरण दर्ज कराकर लगातार कार्रवाई की मांग की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जलनिकासी और रास्ते की समस्या केवल भगन्तु वर्मा के परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आसपास रहने वाले कई परिवार प्रभावित हैं। बारिश के दौरान पानी के बहाव और खराब रास्ते के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का दावा है कि रास्ता खराब होने के कारण पहले भी लोगों को चोटें लग चुकी हैं।
भगन्तु वर्मा के मकान के ढहने के बाद अब समस्या और गंभीर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब परिवार के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था तत्काल जरूरी है। उनका आरोप है कि पात्र होने के बावजूद भगन्तु वर्मा को अब तक आवास योजना का लाभ नहीं मिला। दूसरी ओर गांव की नाली और रास्ते की समस्या भी बनी हुई है।
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि मामले को केवल शिकायत पोर्टल पर निस्तारित करने के बजाय मौके पर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाए। भगन्तु वर्मा को पात्रता के आधार पर तत्काल आवास उपलब्ध कराने के साथ विश्वकर्मा बस्ती से गोसाई बस्ती तक नाली और खड़ंजे की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की गई है।
अब सवाल यह है कि जब शिकायत सरकारी पोर्टल पर दर्ज हुई और उसे निस्तारित भी कर दिया गया, तो जमीन पर काम क्यों नहीं हुआ। मकान गिरने के बाद सामने आई यह स्थिति सरकारी शिकायत निस्तारण व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जांच कराएगा और कागजी निस्तारण के बजाय वास्तविक समस्या का समाधान कराएगा।




