नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद को गुल्लक लेकर डीएम कार्यालय पहुंचा 10 वर्षीय अल्फाज

कुशीनगर के 10 वर्षीय अल्फाज ने नेपाल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अपनी गुल्लक डीएम को सौंपी। उसने अपनी एक साल की बचत जरूरतमंदों के काम आने की इच्छा जताई। टीवी पर बाढ़ की तस्वीरें देखकर अल्फाज का मन द्रवित हो गया था।

कुशीनगर/उत्तर प्रदेश। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे हुई तबाही की तस्वीरों ने पड़रौना क्षेत्र के बेतिया गांव निवासी 10 वर्षीय मासूम अल्फाज शेख को इतना प्रभावित किया कि उसने अपनी करीब एक साल की बचत बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देने का फैसला कर लिया। अपनी गुल्लक लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे अल्फाज ने जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को गुल्लक सौंपते हुए अनुरोध किया कि उसमें जमा पूरी धनराशि को अधिकृत राहत कोष में जमा कराया जाए, ताकि इसका उपयोग नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए किया जा सके।
अल्फाज अपने परिजनों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा था। उसके हाथ में वह गुल्लक थी, जिसमें वह लंबे समय से छोटी-छोटी रकम जमा कर रहा था। जिलाधिकारी को गुल्लक सौंपने के साथ उसने एक प्रार्थना पत्र भी दिया। इसमें उसने अपनी बचत को नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए इस्तेमाल किए जाने की इच्छा जताई।
परिजनों के अनुसार, अल्फाज ने टेलीविजन और सामाजिक माध्यमों के जरिए नेपाल में आई बाढ़ से हुई तबाही की तस्वीरें और समाचार देखे थे। बाढ़ के कारण लोगों के घरों और जनजीवन को प्रभावित होते देखकर उसके मन में पीड़ितों की मदद करने की भावना जागी। इसके बाद उसने अपनी गुल्लक में जमा रकम जरूरतमंदों के लिए देने का निर्णय लिया।
करीब एक साल से अल्फाज अपनी छोटी-छोटी बचत गुल्लक में जमा कर रहा था। आमतौर पर इस उम्र के बच्चे अपनी बचत से खिलौने, चॉकलेट या अपनी पसंद की अन्य चीजें खरीदने की योजना बनाते हैं, लेकिन अल्फाज ने अपनी बचत ऐसे लोगों की मदद के लिए देने का फैसला किया, जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से जानता तक नहीं है। उसकी इसी सोच ने उसकी पहल को खास बना दिया।
अल्फाज की गुल्लक में जमा रकम भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन जरूरत के समय अपनी बचत किसी पीड़ित के लिए समर्पित करने की उसकी भावना ने लोगों का ध्यान खींचा। जिलाधिकारी कार्यालय में मौजूद लोगों ने भी मासूम की संवेदनशीलता और पहल की सराहना की। उसकी इस कोशिश को इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
अल्फाज की पहल ने यह संदेश भी दिया कि किसी जरूरतमंद की सहायता के लिए उम्र या आर्थिक सामर्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण संवेदनशीलता और मदद करने की इच्छा होती है। दस वर्षीय बच्चे द्वारा अपनी करीब एक वर्ष की बचत बाढ़ पीड़ितों के लिए समर्पित करना समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

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