दिल्ली में आईएसआई के जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़,सराय काले खां से मोहम्मद साहिल और समीरा गिरफ्तार
दिल्ली में आईएसआई के जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें सराय काले खां से एक दंपती मोहम्मद साहिल और समीरा को गिरफ्तार किया गया है। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

नई दिल्ली। जासूसी के तौर-तरीकों में तेजी से हो रहे बदलाव ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब जासूसी नेटवर्क के लिए किसी संवेदनशील क्षेत्र में जाकर सीधे संपर्क स्थापित करना जरूरी नहीं रह गया है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से घर बैठे किसी व्यक्ति से दोस्ती करना, उसका विश्वास जीतना और धीरे-धीरे उसे अपने प्रभाव में लेना भी जासूसी गतिविधियों का हिस्सा बन सकता है।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, ऐसे मामलों में शुरुआत बेहद सामान्य बातचीत से होती है। सामने वाला व्यक्ति दोस्ती, रोजगार, आर्थिक मदद या किसी साझा रुचि के बहाने संपर्क स्थापित कर सकता है। लगातार बातचीत के जरिए विश्वास कायम करने के बाद धीरे-धीरे ऐसे अनुरोध किए जाने लगते हैं, जिनका संबंध संवेदनशील सूचनाओं या गतिविधियों से हो सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति को लंबे समय तक यह एहसास भी नहीं होता कि वह किसी संगठित नेटवर्क के संपर्क में है।
हालिया जांच में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स ने भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर कुछ भारतीय वाट्सऐप समूहों में प्रवेश करने का प्रयास किया। इन समूहों में शामिल लोगों से संपर्क बढ़ाना और वहां साझा की जाने वाली सूचनाओं तक पहुंच बनाना नेटवर्क का उद्देश्य बताया जा रहा है। भारतीय मोबाइल नंबर होने के कारण संपर्क में आने वाले लोगों को आसानी से यह अंदाजा नहीं हो पाता कि दूसरी ओर से बातचीत करने वाला व्यक्ति विदेश में बैठा हो सकता है। इस तरह भारतीय नंबर जासूसी नेटवर्क के लिए एक तरह के ‘गेटवे’ के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका सामने आई है।
जांच में गिरफ्तार साहिल के बारे में सामने आया कि उसका जन्म 2001 में हुआ था। उसने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई पूरी की और एलएलबी करने की योजना के तहत एक वकील के साथ काम करना शुरू किया था। पिछले वर्ष जून में उसने नौकरी छोड़ दी थी और इसके बाद से वह बेरोजगार था। उसके पिता मोहम्मद असफाक वर्ष 1982 में अपने गृह नगर बदायूं से दिल्ली आए थे और सराय काले खां में बस गए थे। वह वहां कार मैकेनिक का काम करते हैं।
वहीं, समीरा का जन्म 2005 में हुआ था। उसने दिल्ली से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्राचार के माध्यम से बीए किया। गिरफ्तारी से पहले वह नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम कर रही थी। उसके पिता नदीम वर्ष 1996 में अपने गृह नगर बिजनौर से दिल्ली आए थे और शकूरपुर में रहने लगे। वह स्थानीय बाजारों में कोल्ड ड्रिंक और पानी की बोतलों की आपूर्ति का काम करते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंटरनेट मीडिया पर इस्तेमाल की जा रही पहचान की वास्तविकता का पता लगाना है। फर्जी नाम, तस्वीर और प्रोफाइल के जरिए किसी व्यक्ति से लंबे समय तक संपर्क बनाए रखा जा सकता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली सामान्य जानकारियों का इस्तेमाल भी संपर्क बढ़ाने और व्यक्ति की गतिविधियों को समझने के लिए किया जा सकता है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत आगे बढ़ने के बाद मोबाइल फोन, संदेश भेजने वाले अनुप्रयोगों और डिजिटल लेन-देन से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण हो जाते हैं। किसी संवेदनशील स्थान की तस्वीर, किसी व्यक्ति की आवाजाही से जुड़ी जानकारी अथवा किसी अधिकारी या संस्थान से संबंधित सामान्य नजर आने वाली सूचना भी जासूसी नेटवर्क के लिए उपयोगी हो सकती है। इसी वजह से डिजिटल फोरेंसिक अब जासूसी से जुड़े मामलों की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों में डिजिटल गतिविधियों, संपर्कों और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। बदलते डिजिटल दौर में जासूसी के इन नए तरीकों ने सुरक्षा तंत्र के लिए चुनौती बढ़ा दी है और इंटरनेट मीडिया पर अनजान लोगों से होने वाले संपर्कों को लेकर सतर्कता की जरूरत भी सामने आई है।




