बिहार की लक्ष्मी को सैल्यूट ,दोनों हाथ नहीं, फिर भी पैरों से लिखकर कर रही पढ़ाई, शिक्षक बनने का है सपना
कहते हैं कि इरादे बुलंद हो मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं। 13 साल की लक्ष्मी का हौसला तो ऐसा है कि उसके जैसी हालत में बड़े-बड़े टूट जाएं। वो खुद हौसले की जीती जागती मिसाल है।

कटिहार/बिहार। हौसला बुलंद हो तो शारीरिक चुनौतियां भी मंजिल की राह नहीं रोक सकतीं। कटिहार जिले के हसनगंज प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतोरिया की कक्षा चार की छात्रा 13 वर्षीय लक्ष्मी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग लक्ष्मी ने पढ़ाई की ललक में पैरों की उंगलियों के बीच पेन पकड़कर लिखना सीख लिया है। वह पढ़-लिखकर शिक्षक बनना चाहती है।
लक्ष्मी शारीरिक बाधाओं के बावजूद नियमित रूप से विद्यालय पहुंचती है और अन्य बच्चों के साथ पढ़ाई करती है। पढ़ाई के अलावा वह विद्यालय में होने वाली खेलकूद सहित अन्य गतिविधियों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेती है। उसके हौसले और मेहनत ने उसे विद्यालय के अन्य बच्चों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा बना दिया है।
लक्ष्मी का कहना है कि उसे पढ़ने का बहुत शौक है और वह आगे पढ़ाई जारी रखना चाहती है। उसका सपना पढ़-लिखकर शिक्षक बनने का है। हाथ नहीं होने के बावजूद वह पैरों की उंगलियों के सहारे लिखती है और विद्यालय में दिए जाने वाले कार्यों को पूरा करने का प्रयास करती है।
विद्यालय की शिक्षिका रिंकू कुमारी ने बताया कि लक्ष्मी अन्य बच्चों की तरह ही पढ़ाई करती है। हाथ नहीं होने के कारण वह पैरों से लिखती है, लेकिन पढ़ाई में उसकी लगन किसी से कम नहीं है। उसे जो भी कार्य दिया जाता है, वह उसे पूरा करने का प्रयास करती है। शिक्षिका ने कहा कि सरकार की ओर से लक्ष्मी को आवश्यक सहायता मिले तो उसका भविष्य और बेहतर बनाया जा सकता है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने कहा कि विद्यालय में सभी बच्चों को समान अवसर दिया जाता है। लक्ष्मी के दोनों हाथ नहीं होना उसके लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन विभाग की ओर से उसकी हरसंभव मदद की जा रही है। विद्यालय प्रबंधन उसके माता-पिता के लगातार संपर्क में है। उन्होंने बताया कि एक बार चिकित्सा विभाग की टीम ने विद्यालय पहुंचकर लक्ष्मी की जांच की थी और उसे 100 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाणपत्र भी दिया गया है।
लक्ष्मी की मां रेणु देवी ने बताया कि उसके जन्म के समय लोगों ने परिवार को बच्ची को कहीं छोड़ देने तक की सलाह दी थी, लेकिन परिवार ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह और उनके पति मजदूरी करते हैं और मेहनत की कमाई से बेटी की पढ़ाई जारी रख रहे हैं। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि लक्ष्मी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो और भविष्य में उनके नहीं रहने पर भी समाज में सम्मान के साथ जीवन जी सके।
हसनगंज प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आयुष भारद्वाज ने बताया कि सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विद्यालय पहुंचकर लक्ष्मी की जांच की है। विभाग की ओर से नियमानुसार जो भी सहायता संभव होगी, उसे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
लक्ष्मी की कहानी उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो छोटी-छोटी कठिनाइयों के सामने हिम्मत हार जाते हैं। दोनों हाथ न होने के बावजूद पैरों से लिखकर शिक्षा हासिल करने की उसकी जिद और शिक्षक बनने का सपना उसके मजबूत हौसले को दर्शाता है। परिवार, विद्यालय और प्रशासन के सहयोग से लक्ष्मी अपनी मंजिल की ओर लगातार कदम बढ़ा रही है।




