गाजियाबाद में राज्य कर विभाग का कर्मचारी पांच हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार
गाजियाबाद में मेरठ एंटी करप्शन टीम ने राज्य कर विभाग के कर्मचारी लोकेश को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि जीएसटी नोटिस के निस्तारण के लिए पहले 16 हजार रुपये मांगे गए थे।

गाजियाबाद। मेरठ एंटी करप्शन टीम ने गुरुवार को गाजियाबाद में राज्य कर विभाग के एक कर्मचारी को पांच हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई कविनगर थाना क्षेत्र में एक चाय की दुकान के पास की गई। टीम ने आरोपी को रकम लेते हुए पकड़ने के बाद कविनगर थाने लाकर पूछताछ की और गिरफ्तारी से संबंधित प्रक्रिया पूरी की।
गिरफ्तार कर्मचारी की पहचान लोकेश पुत्र रोहताश सिंह के रूप में हुई है। वह मोदीनगर के ग्राम हुसैनपुर का निवासी बताया गया है और उसकी उम्र करीब 30 वर्ष है। आरोपी राज्य कर विभाग के कार्यालय में सहायक के पद पर तैनात बताया जा रहा है। कार्रवाई एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक मयंक अरोड़ा के नेतृत्व में की गई।
मामले की शुरुआत राज्य कर विभाग की ओर से जारी एक नोटिस को लेकर हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार, नोटिस के निस्तारण के संबंध में उसकी लोकेश से बातचीत हुई थी। आरोप है कि नोटिस में कोई कमी नहीं होने के बावजूद उसे समाप्त कराने के नाम पर कर्मचारी ने रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता के मुताबिक, शुरुआत में 16 हजार रुपये मांगे गए थे।
रकम अधिक होने के कारण शिकायतकर्ता ने भुगतान करने के बजाय मामले की जानकारी एंटी करप्शन मेरठ इकाई को दी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू की। इसके बाद आरोपी को रिश्वत लेते पकड़ने के लिए कार्रवाई की योजना तैयार की गई। बताया गया कि करीब एक महीने तक शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच रकम को लेकर बातचीत होती रही, जिसके बाद कथित रिश्वत की रकम पांच हजार रुपये पर तय हुई।
योजना के तहत शिकायतकर्ता को रकम लेकर आरोपी के पास भेजा गया। आरोपी ने उसे कविनगर क्षेत्र स्थित एक चाय की दुकान पर मिलने के लिए बुलाया था। एंटी करप्शन टीम के सदस्य आसपास मौजूद रहे और लेन-देन पर निगरानी रखी। शिकायतकर्ता द्वारा रकम दिए जाने के बाद टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए लोकेश को हिरासत में ले लिया। टीम के मुताबिक, उसके पास से पांच हजार रुपये बरामद किए गए।
इसके बाद आरोपी को कविनगर थाने लाया गया, जहां गिरफ्तारी से संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। एंटी करप्शन टीम ने उससे पूछताछ भी की। अब टीम मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि राज्य कर विभाग की ओर से जारी नोटिस किस मामले से संबंधित था और उसके निस्तारण में आरोपी की विभागीय भूमिका क्या थी।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर मांगी गई रकम किस काम के लिए ली जानी थी और इस प्रकरण में राज्य कर विभाग के किसी अन्य कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की कोई भूमिका थी या नहीं। शिकायत और कार्रवाई के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



