देवी विनायकी के रूप में पूजी जाती हैं गणेश की स्त्री शक्ति, भारत के कई प्राचीन मंदिरों में मौजूद हैं प्रतिमाएं
देवी विनायकी को भगवान गणेश का अनोखा स्त्री स्वरूप माना जाता है, जिन्हें गणेश्वरी और गजाननी भी कहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, अंधक राक्षस का वध करने के लिए गणेशजी ने इस मातृ शक्ति रूप को धारण किया था। राजस्थान, ओडिशा और तमिलनाडु के कई प्राचीन मंदिरों में देवी विनायकी की प्रतिमाएं आज भी मौजूद हैं।

धर्म डेस्क,नई दिल्ली। हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले गणेश पूजा की परंपरा है। उन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि, समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। धार्मिक और शाक्त परंपराओं में गणेश के एक अनोखे स्त्री स्वरूप का भी उल्लेख मिलता है, जिसे देवी विनायकी कहा जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में इन्हें गणेश्वरी, गणेशानी और गजाननी जैसे नामों से भी जाना जाता है।
देवी विनायकी का स्वरूप भगवान गणेश से काफी मिलता-जुलता माना जाता है, लेकिन इसमें हाथी का मुख और स्त्री शरीर का स्वरूप दिखाई देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी विनायकी को भगवान गणेश की स्त्री शक्ति अथवा गणेश और शक्ति के संयुक्त स्वरूप के रूप में देखा जाता है। भारत के कुछ प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर देवी विनायकी की प्रतिमाएं मिलने की बात कही जाती है।
राजस्थान के खेड़ में देवी विनायकी की प्राचीन प्रतिमा का उल्लेख मिलता है। ओडिशा के हीरापुर स्थित 64 योगिनी मंदिर में भी विनायकी का स्वरूप मौजूद है। हीरापुर का यह मंदिर अपनी प्राचीन योगिनी परंपरा और शाक्त साधना के लिए प्रसिद्ध है। दक्षिण भारत में भी देवी विनायकी के स्वरूप की पूजा से जुड़ी परंपराएं मिलती हैं। तमिलनाडु के कन्याकुमारी क्षेत्र में स्थित थानुमालयन मंदिर में भी देवी के इस स्वरूप की प्राचीन प्रतिमा होने का उल्लेख मिलता है।
देवी विनायकी से जुड़ी एक प्रमुख पौराणिक कथा का संबंध अंधकासुर से बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अंधक नामक राक्षस मां पार्वती को अपनी पत्नी बनाना चाहता था। मां पार्वती की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अंधक पर प्रहार किया। किंवदंती के अनुसार अंधक के शरीर से जब रक्त की बूंदें धरती पर गिरती थीं, तो प्रत्येक बूंद से एक नया राक्षस उत्पन्न हो जाता था। इससे अंधक की शक्ति लगातार बढ़ती जा रही थी।
अंधक के इस स्वरूप का सामना करने के लिए देवी-देवताओं की शक्तियों से विभिन्न मातृ शक्तियों के प्रकट होने की कथा मिलती है। इसी क्रम में गणपति के मातृ शक्ति स्वरूप के रूप में भी देवी विनायकी का उल्लेख किया जाता है। मान्यता है कि युद्ध के दौरान इस शक्ति ने अंधक के रक्त को धरती पर गिरने से रोकने में भूमिका निभाई और अंततः अंधक का वध हुआ।
इसी पौराणिक परंपरा के कारण देवी विनायकी को भगवान गणेश की स्त्री शक्ति के रूप में देखा जाता है। उनकी प्रतिमाओं में गणेश से जुड़े हाथी के मुख सहित कई प्रतीक दिखाई देते हैं, जबकि शरीर का स्वरूप स्त्री का होता है। देवी विनायकी से जुड़ी मान्यताएं भारतीय धार्मिक परंपराओं में गणेश उपासना, मातृ शक्ति और शाक्त परंपरा के विभिन्न रूपों की विविधता को सामने लाती हैं।




