मुजफ्फरनगर रैली से पहले पीएम मोदी से सपरिवार मिले जयंत चौधरी, यूपी की सियासत में बढ़ी हलचल
केंद्रीय मंत्री और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उनकी पत्नी और दोनों बेटियां भी उनके साथ थीं।

मुजफ्फरनगर,उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सपरिवार मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उनकी पत्नी चारू चौधरी और दोनों बेटियां भी मौजूद रहीं। जयंत चौधरी ने मुलाकात की तस्वीर साझा की, जिसके बाद इसके राजनीतिक संदेश को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। यह मुलाकात 20 सितंबर को मुजफ्फरनगर में प्रस्तावित जयंत चौधरी की रैली से दो दिन पहले हुई है।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। भाजपा और रालोद के बीच मौजूदा राजनीतिक तालमेल के बीच जयंत चौधरी की प्रधानमंत्री से मुलाकात को दोनों दलों के बीच समन्वय और राजनीतिक संवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर किसी नए राजनीतिक निर्णय की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
जयंत चौधरी की मुजफ्फरनगर रैली से पहले हुई इस मुलाकात के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं और तेज हो गई हैं। 20 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम के बाद 21 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरे की भी खबरें हैं। क्षेत्र में अलग-अलग दलों के कार्यक्रमों के चलते राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।
इस बीच जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच हाल के दिनों में राजनीतिक बयानबाजी भी चर्चा में रही है। अखिलेश यादव के एक बयान में गठबंधन के पुराने सहयोगियों को लेकर ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद जयंत चौधरी ने इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़ते हुए प्रतिक्रिया दी थी। जयंत ने कहा था कि लोकतंत्र में किसान और आम जनता किसी को नेता बनाती है और कोई नेता किसी को रुपया नहीं बना सकता। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को अहंकार से जोड़ते हुए भी निशाना साधा था।
सितंबर की शुरुआत में सहारनपुर में आयोजित रालोद की स्वाभिमान रैली में जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी भी मंच पर पहुंची थीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने पति के फैसलों के समर्थन की बात कही थी। इस कार्यक्रम को भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद की राजनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा गया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी क्षेत्र का अपना अलग राजनीतिक महत्व है। ऐसे में मुजफ्फरनगर में होने वाली रैली, प्रधानमंत्री से जयंत चौधरी की मुलाकात और इसके आसपास होने वाले अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों ने क्षेत्र में चुनावी चर्चाओं को तेज कर दिया है। विभिन्न दल अपने-अपने राजनीतिक मुद्दों और सामाजिक समीकरणों के साथ जनता के बीच पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर इन गतिविधियों का राजनीतिक असर क्या होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।




