18 वर्षों से सफाई का इंतजार: शकरपुर के नाले की बदहाल स्थिति पर उठे सवाल, स्थायी समाधान की मांग तेज

नई दिल्ली। शकरपुर वार्ड संख्या 202 में रेलवे भूमि पर स्थित एक बड़े नाले की बदहाल स्थिति को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले लगभग 18 वर्षों से नाले की नियमित और समुचित सफाई नहीं हुई है, जिसके चलते यह पूरी तरह गाद, कचरे और गंदगी से भर चुका है।
बरसात के दौरान जल निकासी बाधित होने से आसपास की गलियों और मुख्य मार्गों पर गंभीर जलभराव की स्थिति बन जाती है। कई बार गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों को आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई बार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली जल बोर्ड मंत्री प्रवेश वर्मा, दिल्ली पुलिस आयुक्त और क्षेत्रीय विधायक अभय वर्मा सहित संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
एमसीडी और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि नाला रेलवे की भूमि पर स्थित है, इसलिए इसकी सफाई रेलवे विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है। विभागों के बीच जिम्मेदारी तय न होने के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
5 जुलाई 2026 को शकरपुर मंडल महामंत्री संजीव तिवारी के प्रयासों से जेसीबी मशीन द्वारा नाले की सफाई शुरू कराई गई, लेकिन महज 20 मिनट बाद ही कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। इस दौरान नाले के ऊपर रखे पत्थरों को हटाकर कुछ पत्थर नाले में ही गिरा दिए गए और बाकी को भी व्यवस्थित रूप से वापस नहीं रखा गया, जिससे स्थिति और खतरनाक हो गई।
हालात इतने गंभीर हो गए कि एक गाय नाले में गिर गई, जिसे स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बाहर निकाला। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि इस तरह की घटना में कोई व्यक्ति गिर जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।
लोगों ने प्रशासन से सवाल उठाया है कि आखिर 18 वर्षों से इस नाले की सफाई क्यों नहीं की गई और बार-बार शिकायतों के बावजूद समाधान क्यों नहीं हुआ। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
क्षेत्रवासियों ने रेलवे प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए नाले की तत्काल, पूर्ण और वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराई जाए। साथ ही नाले के ऊपर रखे पत्थरों को सुरक्षित रूप से पुनः स्थापित किया जाए और भविष्य में नियमित सफाई की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि इस समस्या का स्थायी समाधान चाहिए।




