जमानत लेकर वारदात करने वालों को भेजा जाएगा जेल,आदतन अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी

नई दिल्ली। राजधानी से क्राइम कम करने के लिए पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने आदतन अपराधियों की नकेल कसने के निर्देश दिए हैं। सभी जिलों को कहा गया है कि जमानत लेकर फिर से वारदातों में लिप्त होने वाले ऐसे बदमाशों की पहचान करने को कहा गया है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि पुराने केसों में मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने को आधार बनाते हुए अदालत से इनकी बेल कैंसल करवाई जाए। इस रणनीति को स्ट्रीट क्राइम से लेकर गैंगवॉर तक पर काबू पाने के लिए कारगर माना जा रहा है। पुलिस अफसरों ने बताया कि किसी भी मामले में जमानत देते वक्त कोर्ट कुछ शर्तें आरोपी के सामने रखती है। एक शर्त यह भी होती है कि वह जिस अपराध में बेल ले रहा होता है, उस तरह के अपराध की गतिविधि में दोबारा शामिल नहीं होगा। आदतन अपराधी दर्जनों केसों में जमानत लेकर आते हैं और लगातार वैसी ही वारदातों को अंजाम देते हैं। जल्दी-जल्दी कोर्ट से बेल हासिल करने से अपराधियों में खौफ खत्म हो जाता है। इसी वजह से वह निडर होकर ताबड़तोड़ अपराधों को अंजाम देते रहते हैं।

पुलिस अफसरों ने बताया कि पुलिस कमिश्नर ने अफसरों को साफ निर्देश दिए हैं कि इस तरह के अपराधियों की सूची बनाई जाए। अगर वह लगातार क्राइम कर रहे हैं, तो उनकी जमानत कैंसल करने के लिए पुलिस की तरफ से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाए। पुलिस अफसर कहते हैं कि इस नियम से सभी पुलिसवाले परिचित हैं, लेकिन कभी इसे लागू करने के बारे में विचार नहीं किया गया। लेकिन अब कमिश्नर ने इसे गंभीरता से लागू करने को कहा है, ताकि क्राइम की रोकथाम हो सके।

शांति भंग की आशंका वालों पर भी शिकंजा
पुलिस कमिश्नर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि थाना इलाकों में शांति भंग करने की आशंका के मामले में सीआरपीसी 107/151 के तहत स्पेशल इग्जेक्यूटिव मैजिस्ट्रेट (SEM) की कोर्ट में बॉन्ड भरकर छूटे आरोपी भी अगर 6 महीने के भीतर दोबारा उसी काम में लिप्त पाए जाते हैं, तो उन्हें भी जेल भेजा जाए। पुलिस अफसरों ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 121 के तहत मैजिस्ट्रेट को यह शक्ति होती है।

सीपी के निर्देश का ग्रासरूट पर ज्यादा असर नहीं
जमानत कैंसल कराने को लेकर थाना लेवल पर ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाई दे रही है। अफसरों का कहना है कि पुलिसवालों के पास रोजाना काफी काम रहता है। बेल कैंसल करने के लिए अपील में भी जाना पड़ सकता है। कैंसिलेशन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पुलिसकर्मी को लगाना पड़ेगा। थाना लेवल पर पहले ही स्टाफ की कमी है और वर्क लोड ज्यादा है। इसलिए जमानत कैंसल करने के मामलों में फिलहाल तेजी नहीं आ पा रही है।

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