जंतर-मंतर से उभरती ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ मुहिम ने पकड़ा राजनीतिक रंग, नए दल के गठन के कयास तेज
अमेरिका से शुरू हुआ 'काकरोच जनता पार्टी' आंदोलन अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर राजनीतिक आकार ले रहा है।

नई दिल्ली। अमेरिका से आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता अभिजीत दीपके द्वारा इंटरनेट मीडिया पर शुरू की गई व्यंग्यात्मक मुहिम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर राजनीतिक स्वरूप लेने लगी है। वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जिस स्थान पर आम आदमी पार्टी का उदय हुआ था, वहीं अब एक बार फिर गैर-राजनीतिक अभियान से नए राजनीतिक दल के उभरने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
यह मुहिम भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा कुछ युवाओं की तुलना काकरोच से किए जाने की टिप्पणी के विरोध में इसी वर्ष मई में शुरू की गई थी। सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर इसे व्यापक समर्थन मिला और इसके फॉलोअर्स की संख्या एक करोड़ के पार पहुंच गई। इससे उत्साहित होकर अभिजीत दीपके छह जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे और नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर धरना दिया, हालांकि शुरुआती दिनों में आंदोलन को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल सका।
इसके बाद दीपके लखनऊ में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे, जहां उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जबकि जयपुर में उनके साथ धक्का-मुक्की और हमले की घटना भी सामने आई। 20 जून से जंतर-मंतर पर दोबारा धरना शुरू किया गया, लेकिन भीड़ जुटाने में मुश्किलें बनी रहीं।
आंदोलन को नया मोड़ तब मिला, जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इससे जुड़े और 27 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठ गए। उनके जुड़ने से आंदोलन चर्चा में आया, हालांकि भीड़ का संकट बना रहा। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद मार्च की घोषणा के बाद विपक्षी दलों ने इसे केंद्र सरकार को घेरने के अवसर के रूप में देखा और वामपंथी छात्र संगठनों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी इस मंच से जुड़ने लगे।
18 जुलाई को पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर भीड़ में इजाफा हुआ। इसके बाद वामपंथी दलों, आम आदमी पार्टी, भीम आर्मी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी सहित कई दलों के नेता प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने लगे। सोमवार को आयोजित संसद मार्च में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की भागीदारी के साथ आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया।
वर्तमान में केंद्र सरकार के मंत्री आंदोलनकारियों से वार्ता कर रहे हैं, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। हाई कोर्ट के निर्देश पर सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनसे भी सरकार के प्रतिनिधि संवाद कर रहे हैं।
इधर, विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच इस आंदोलन का श्रेय लेने की होड़ भी तेज हो गई है। नीट पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास के बाहर अलग प्रदर्शन किया, जिसका आम आदमी पार्टी ने विरोध किया। हालांकि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने कांग्रेस के रुख का समर्थन किया है।
पूरे घटनाक्रम को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुहिम भविष्य में एक नए राजनीतिक दल का रूप ले सकती है। हालांकि, यह भी आशंका जताई जा रही है कि यदि आंदोलन में अराजक तत्व हावी होते हैं या हिंसा की स्थिति बनती है, तो इसके राजनीतिक भविष्य को नुकसान पहुंच सकता है।



