छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे का अहिल्यानगर में मौन आंदोलन शुरू, सरकार से संवाद की अपील
नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रोटेस्ट चल रहा है। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं। इस सब के बीच समाजसेवी अन्ना हजारे अहिल्यानगर में मौन आंदोलन पर चले गए हैं। उन्होंने साइलेंट प्रोटेस्ट की शुरुआत की है।
![]()
पुणे/महाराष्ट्र। देश के वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने दिल्ली में परीक्षा संबंधी कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मौन आंदोलन शुरू किया है। गुरुवार को शुरू हुए इस विरोध के दौरान हजारे भावुक भी नजर आए और छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर गहरी पीड़ा व्यक्त की।
यह विरोध प्रदर्शन उस समय हो रहा है जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले दिल्ली में छात्र ‘चलो संसद’ मार्च के माध्यम से परीक्षा पेपर लीक के आरोपों पर जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अन्ना हजारे ने एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे का समाधान निकालने और छात्रों से संवाद स्थापित करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री के इस्तीफे से सरकार नहीं गिरती, लेकिन इससे जवाबदेही तय होती है।
अन्ना हजारे ने अपने बयान में कहा कि मतभेदों को सुलझाने के लिए हिंसा कभी उचित रास्ता नहीं हो सकती। उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरों को पीड़ादायक बताया। साथ ही उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अत्यधिक बल प्रयोग—दोनों को लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
उन्होंने सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को दूर करने और शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हुए हैं और ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी सामने आई हैं। जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और पत्थरबाजी के आरोप लगाए हैं, वहीं प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है।
उल्लेखनीय है कि 89 वर्षीय अन्ना हजारे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों और पारदर्शिता के लिए लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने जन लोकपाल विधेयक सहित विभिन्न मुद्दों पर कई बार आमरण अनशन किए हैं और सूचना के अधिकार को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।




