लखनऊ में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

लखनऊ पुलिस ने ऑपरेशन CY-VAJRA के तहत विभूतिखंड में चल रहे फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है।

लखनऊ/एजेंसी। उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन CY-VAJRA’ के तहत साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में राजधानी लखनऊ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कमिश्नरेट पुलिस ने विभूतिखंड क्षेत्र में संचालित एक हाईटेक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए मास्टरमाइंड समेत चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को फर्जी एप्पल कस्टमर सपोर्ट और अमेरिकी जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर डराता था और उनसे हजारों डॉलर की ठगी करता था।
डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा के अनुसार, 22 जुलाई की रात मुखबिर की सूचना पर पूर्वी जोन की क्राइम टीम, सर्विलांस टीम और विभूतिखंड थाना पुलिस ने साइबर हाइट बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 420A में छापेमारी की। यहां एक हाईटेक इंटरनेशनल कॉल सेंटर संचालित होता मिला, जहां से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने एप्पल कस्टमर सपोर्ट के नाम से एक फर्जी वेबसाइट तैयार कर उसे गूगल ऐड्स के माध्यम से प्रमोट किया था। जब कोई अमेरिकी नागरिक टोल-फ्री नंबर पर कॉल करता, तो वीओआईपी तकनीक के जरिए कॉल सीधे लखनऊ स्थित कॉल सेंटर पर पहुंचती थी। यहां एजेंट पहले पीड़ित का डेटा सत्यापित करते और फिर कॉल वरिष्ठ सदस्यों को ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद खुद को फेडरल ट्रेड कमीशन या यूएस सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी और जेल भेजने का डर दिखाया जाता था। भयभीत लोगों से गिफ्ट कार्ड, सोना या नकद के रूप में रकम वसूली जाती थी, जिसे बाद में हवाला माध्यम से भारत भेजा जाता था।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मास्टरमाइंड प्रतापगढ़ निवासी सूरज त्रिपाठी है, जिसने वर्ष 2012-13 में अहमदाबाद में कॉल सेंटर का काम सीखा था। उसके साथ उसके मामा राहुल त्रिपाठी, बुआ का बेटा विवेक पांडेय और मुंबई निवासी तकनीकी विशेषज्ञ आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। पुलिस के अनुसार यह एक पारिवारिक साइबर सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 31 लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, दो वाई-फाई राउटर और 18.50 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। साथ ही मास्टरमाइंड की हुंडई वरना कार भी जब्त की गई। मौके पर 35 वर्कस्टेशनों पर कॉलिंग एजेंट काम करते मिले, जिन्हें उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, नागालैंड, मध्य प्रदेश सहित नेपाल से भी भर्ती किया गया था।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कॉल सेंटर में कार्यरत एजेंटों को साइबर ठगी की पूरी जानकारी थी या वे केवल कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे थे। सभी मुख्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button