बिलासपुर में ‘सांप काटने’ के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा, मुर्दों को सांप से डसवाते थे डॉक्टर और वकील

बिलासपुर/छत्तीसगढ़। बिलासपुर जिले में सरकारी मुआवजे की राशि हड़पने के लिए रचे गए एक सनसनीखेज फर्जीवाड़े का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में डॉक्टर, वकील और होमगार्ड सहित कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने मिलकर मौत के मामलों को ‘सांप के काटने’ से जोड़कर लाखों रुपये का अवैध लाभ उठाया।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह नवंबर 2019 से फरवरी 2024 के बीच सक्रिय रहा और प्राकृतिक रूप से हुई मौतों को सांप के काटने का मामला दिखाकर सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करता रहा। इस दौरान आरोपितों ने लगभग 64 लाख रुपये का मुआवजा फर्जी तरीके से प्राप्त किया। बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनीश सिंह के नेतृत्व में की गई कार्रवाई में इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ है।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य अस्पताल में आने वाले शवों की जानकारी जुटाते थे और मृतकों के परिजनों को बहला-फुसलाकर मौत का कारण ‘सांप का काटना’ बताने के लिए राजी करते थे। इसके बाद फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे। आरोप है कि कुछ मामलों में शवों के साथ छेड़छाड़ कर सांप के काटने जैसे निशान तक बनाए गए।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह में शामिल एक वकील शोकाकुल परिवारों को मुआवजे का लालच देकर उन्हें योजना में शामिल करता था, जबकि अन्य सदस्य फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी प्रक्रिया पूरी कराने में मदद करते थे। दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए नकली मुहर और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया जाता था। मुआवजे की राशि लाभार्थियों के खातों में जमा होने के बाद उसका बड़ा हिस्सा गिरोह के सदस्यों में बांट लिया जाता था।
इस मामले में अब तक 16 फर्जी दावों की पहचान की गई है। प्रत्येक मामले में लाभार्थियों को लगभग 50 हजार रुपये दिए जाते थे, जबकि शेष राशि गिरोह अपने पास रखता था। गिरफ्तार आरोपितों में मुख्य सरगना वकील हीरा प्रसाद खांडेकर, बैंक कर्मचारी कुश कुमार गुप्ता, दिहाड़ी मजदूर गोविंद विश्वकर्मा तथा अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि एमडी डॉक्टर प्रियंका सोनी को नागपुर से गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो होमगार्ड कर्मियों को भी हिरासत में लिया गया है। ये सभी उस समय छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सीआईएमएस) में तैनात थे और गिरोह की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नकली सरकारी मुहरें, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, कंप्यूटर, प्रिंटर, नकदी और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। मामले में विभिन्न थानों में 16 एफआईआर दर्ज की गई हैं और अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




