वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन के बाद बैटरी कार-हेलीकॉप्टर सेवा बंद, पारंपरिक मार्ग से वैष्णो देवी यात्रा जारी
लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण वैष्णो देवी मार्ग पर बैटरी कार और हेलीकॉप्टर सेवा बंद कर दी गई है। हालांकि, पारंपरिक मार्ग से यात्रा जारी है।

संवाददाता/सुदेश कुमार
कटड़ा/जम्मू। लगातार हो रही बारिश ने बुधवार को माता वैष्णो देवी के दरबार जाने वाले श्रद्धालुओं की राह मुश्किल जरूर कर दी, लेकिन आस्था का सैलाब ऐसा रहा कि खराब मौसम भी भक्तों के कदम नहीं रोक सका। दिन में उमस के बाद अचानक हुई तेज बारिश ने यात्रा मार्ग को प्रभावित किया, फिर भी श्रद्धालु जयकारों के साथ भवन की ओर बढ़ते रहे।
दोपहर बाद करीब दो से तीन घंटे तक हुई तेज बारिश के कारण भवन मार्ग पर कई स्थानों पर कंकड़-पत्थर और मलबा आ गया। कुछ इलाकों में हल्का भूस्खलन भी हुआ, जिससे रास्ता फिसलन भरा और जोखिमपूर्ण हो गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने दोपहर करीब 3 बजे बैटरी कार मार्ग को अगले आदेश तक बंद कर दिया। इसके साथ ही इस रूट पर संचालित बैटरी कार सेवा को भी तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया।
यह स्थिति पहली बार नहीं बनी। मंगलवार रात करीब 10 बजे भी तेज बारिश के चलते इस मार्ग को बंद करना पड़ा था। हालांकि बुधवार सुबह 6 बजे सफाई के बाद मार्ग खोल दिया गया था, लेकिन दोपहर की बारिश ने फिर हालात बिगाड़ दिए।
बैटरी कार सेवा बंद होने से बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पारंपरिक मार्ग से पैदल, घोड़े, पिट्ठू और पालकी के सहारे श्रद्धालु लगातार भवन की ओर बढ़ते रहे और दर्शन का सिलसिला जारी रहा।
खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। कटड़ा से संचालित हेलीकॉप्टर सेवा पूरे दिन बंद रही। वहीं भवन से भैरव घाटी के बीच चलने वाली रोपवे सेवा को भी तेज बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ घंटों के लिए रोक दिया गया था। हालांकि शाम करीब 5 बजे मौसम में सुधार होने के बाद रोपवे सेवा पुनः शुरू कर दी गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक हेलीकॉप्टर और बैटरी कार सेवा बंद ही रही।
श्राइन बोर्ड ने स्थिति को देखते हुए बैटरी कार मार्ग पर सफाई कर्मियों और आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात कर दिया है। मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मौसम पूरी तरह सामान्य होने और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही मार्ग को दोबारा खोला जाएगा। यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने के लिए श्राइन बोर्ड, पुलिस, सीआरपीएफ और आपदा प्रबंधन की टीमें विभिन्न स्थानों पर मुस्तैद हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी सूचना केंद्र से संपर्क करें। बारिश और बाधाओं के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बुधवार शाम 5 बजे तक करीब 18 हजार श्रद्धालु पंजीकरण कर भवन के लिए रवाना हो चुके थे और देर शाम तक भी यात्रियों का आना-जाना जारी रहा।




