मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले शहीद मेजर वीर ऋषिकेष रामानी के बलिदान को देश याद रखेगा : मगनभाई पटेल

अहमदाबाद/एजेंसी। भारत विकास परिषद, अहमदाबाद की महावीरनगर शाखा ने हाल ही में निकोल के शहीद वीर मंगलपांडे ऑडिटोरियम में देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए देशभक्ति गीतों का एक कार्यक्रम “राष्ट्रीय समूहगान” का आयोजन किया। जिसमें अहमदाबाद की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ९ निजी स्कूलों के कक्षा ५ से १२ तक के १२४ विध्यार्थीओने भाग लिया और मंच पर राष्ट्रगान की खुबसुरति से प्रस्तुति दी।
इस कार्यक्रम में अध्यक्ष एवं मुख्यदाता के रूप में गुजरात के जानेमाने उद्योगपति एवं श्री सौराष्ट्र पटेल सेवा समाज के अध्यक्ष श्री मगनभाई पटेल उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में विजेता बच्चों की टीम को श्री मगनभाई पटेल के करकमलो द्वारा पुरस्कार एवं ट्रॉफी प्रदान कर उनका उत्साह बढ़ाया गया।
इस अवसर पर श्री मगनभाई पटेल ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि यदि आप देश में डॉक्टर बनना चाहते हैं, तो पद्मश्री स्वर्गीय डॉ.एच.एल.त्रिवेदी की तरह बनें,जो कनाडा में प्रैक्टिस करते समय कनाडा के पहले चालीस करदाताओं में से एक थे। पद्मश्री स्वर्गीय डॉ. एच. एल. त्रिवेदी जब गुजरात के किडनी रोगियों के लिए कनाडा से अपनी अथाह संपत्ति और सब कुछ छोड़कर अहमदाबाद आए, तो उन्होंने अकेले ही अहमदाबाद के असारवा में सिविल अस्पताल में एक विश्व स्तरीय किडनी संस्थान की स्थापना की। डॉ.एच.एल.त्रिवेदीने किडनी इंस्टीट्यूट की स्थापना कर मानव समाज की अनूठी एवं नेक सेवा की है जो गौरव का विषय है और उन्होंने स्वयं अपने हाथों से एवं अपने अधीन ५००० से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट एवं ५०० से अधिक लिवर ट्रांसप्लांट किये हैं। उन्होंने लीवर प्रत्यारोपण करके देश और दुनिया में “विश्व रिकॉर्ड” स्थापित किया और इस संस्थान के दानकर्ता के साथ-साथ अपने स्वयं के फंड से लगभग ८००करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया और बैंकों में करोड़ो रूपये की फिक्सड डिपॉज़िट के माध्यम से इस परियोजना का संचालन किया जिसमें पत्नी सुनीताबेन त्रिवेदीने भी कंधे से कंधा मिलाकर उनका सहयोग किया।
श्री मगनभाई पटेलने कहा कि अगर आप एक सफल उद्योगपति बनना चाहते हैं तो सौराष्ट्र के श्री मेघजीभाई पेथराज की तरह बनें। शाह मेघजीभाई पेथराज, जो जामनगर के मूल निवासी थे और अफ्रीका में एक उद्यमी थे उन्होंने वर्ष १९६० से दान देना शुरू किया और गुजरात में लगभग २००० लाइब्रेरी बनाई, जिसका नाम “कस्तूरबा पुस्तकालय” रखा गया। सुरेंद्रनगर जिले में कला और वाणिज्य के लगभग ६ कॉलेजों का निर्माण किया और जामनगर में एम.पी शाह मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया,जो गुजरात में पांचवी मेडिकल कॉलेज थी और अहमदाबाद में सिविल अस्पताल,असारवा में एम.पी.शाह कैंसर अस्पताल का निर्माण किया और एक प्रमुख दाता के रूप में समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान किया। इस प्रकार यदि आप एक उद्योगपति बनना चाहते हैं, तो श्री मेघजीभाई पेथराज की तरह बनें।
श्री मगनभाई पटेलने अंततः कहा कि यदि आप जीवन में राजनीतिक व्यक्ति बनना चाहते हैं, तो सरदार साहब की तरह बनें। एक दिन सरदार वल्लभभाई पटेल की नज़र उनके घर में मेज़ पर पड़े हुए एक मैगज़ीन पर पड़ी उन्होंने अपने पुत्र श्री डाह्याभाई पटेल को बुलाया और पूछा इस मैगज़ीन में इतने सारे विज्ञापन क्यों हैं, उनके पुत्र डाह्याभाई ने कहा की “बापूजी,आप देश के उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री जैसे उच्च पदों पर हैं इसलिए लोग इतने सारे विज्ञापन दे रहे हैं, तब सरदार साहबने अपने बेटे डाह्याभाई को फटकार लगाते हुए कहा,”अगर लोग मुझे मेरे पद पर बैठा देखकर ये विज्ञापन दे रहे हैं तो इस मैगज़ीन को तुरंत बंद कर दो, सरदार साहबने अपनी बेटी मणिबेन को बुलाकर कहा की यदि डाह्याभाई को यह मैगज़ीन चलाना हो तो इस घर से निकल जाये और किसी दूसरी जगह पर जाकर रहे और यह काम करे।” ऐसा था श्री सरदार वल्लभभाई पटेल का पारदर्शी राजनीतिक व्यक्तित्व।




