होर्मुज पर फिर बवाल: ईरान ने लौटाया भारत का टैंकर, ट्रंप का बड़ा बयान, ईरान पर फिर हमले की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन में ईरान पर फिर से हमला करने की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि आज रात अमेरिका, तेहरान पर हमला कर सकता है।

वॉशिंगटन/एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज कर दी है। अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “संभवतः आज रात ईरान पर फिर हमला कर सकता है।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव चरम पर है।
ट्रंप ने यह टिप्पणी अंतरिम समझौते को समाप्त घोषित करने और ईरान के प्रति कड़ी प्रतिक्रिया जताने के कुछ ही घंटों बाद की। उन्होंने ईरान के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका तेहरान में सरकार बदलने का इच्छुक नहीं है, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अपने रुख पर दृढ़ है।
अंकारा में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान की हालिया गतिविधियां चिंताजनक हैं और अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। उन्होंने संकेत दिए कि हालात के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इधर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इसके जवाब में अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाने की भी खबरें हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान के कॉरिडोर से गुजर रहे एक भारतीय तेल टैंकर को वापस भेज दिया गया। बताया गया कि ईरानी बल जहाजों को चेतावनी देते हुए अपने निर्धारित मार्ग का पालन करने के निर्देश दे रहे हैं।
उधर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सऊदी तेल टैंकर ‘वाडियान’ पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा हैं और इससे क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता यह तनाव वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए चुनौती बन सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।




