रायबरेली में अंग्रेजों के जमाने की हवाई पट्टी पर अवैध कब्जा,रक्षा संपदा टीम ने शुरू किया सीमांकन
रायबरेली में इकछनिया हवाई पट्टी की भूमि का सीमांकन कार्य अब रफ्तार पकड़ चुका है। मंगलवार को रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ की टीम अचानक इकछनिया गांव पहुंची, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।

रायबरेली/उत्तर प्रदेश। जिले की ऐतिहासिक इकछनिया हवाई पट्टी की भूमि का सीमांकन कार्य अब तेज गति से शुरू हो गया है। मंगलवार को रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ की टीम के अचानक इकछनिया गांव पहुंचने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान टीम को हवाई पट्टी के घंटाघर और टावर पर अवैध कब्जे मिलने की पुष्टि हुई है।
जांच में यह भी सामने आया कि ग्रामीण घंटाघर भवन का उपयोग निजी कार्यों के लिए कर रहे थे। इसके बाद टीम ने मौके पर ही नापजोख कर भूमि का सीमांकन कार्य प्रारंभ कर दिया। यह हवाई पट्टी रायबरेली शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर सदर तहसील के इकछनिया गांव में स्थित है, जिसका निर्माण अंग्रेजों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1942-43 में कराया था।
करीब 500 बीघे में फैली यह हवाई पट्टी कभी सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती थी, लेकिन वर्षों से देखरेख के अभाव में इसका स्वरूप लगभग समाप्त हो चुका है। वर्तमान में यहां वीरानी पसरी हुई है और आसपास के ग्रामीण भूमि पर पशु चराने के साथ ही कई स्थानों पर अवैध कब्जे भी कर चुके हैं। रक्षा संपदा कार्यालय की टीम ने इस बेशकीमती भूमि के सर्वे और सीमांकन का कार्य तेज कर दिया है। मंगलवार को पहुंची टीम के साथ सदर और ऊंचाहार तहसील के राजस्व कर्मियों को भी पैमाइश के कार्य में लगाया गया।
हवाई पट्टी के दायरे में इकछनिया के अलावा कंचौदा, सराय मोहम्मद शरीफ, नवाबगंज, सान्हू कुआं, भांव, जमालपुर नानकारी और बेनी कोपा सहित कई गांव आते हैं। रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ के उप मंडलीय अधिकारी राम वर्मा ने बताया कि हवाई पट्टी के नाम दर्ज भूमि का सर्वे और सीमांकन कार्य तेजी से किया जा रहा है। सभी प्रभावित गांवों में भूमि को चिन्हित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जांच में घंटाघर और टावर पर अवैध कब्जे पाए गए हैं। पूरी नापजोख के बाद संबंधित ग्रामीणों को तत्काल कब्जा खाली करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और आगे अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।




